सरकार ने सोमवार को बोला कि डीजल के साथ इथेनॉल का मिश्रण अभी भी प्रायोगिक चरण में है, और वर्तमान में इसे जरूरी करने की कोई योजना नहीं है. राज्यसभा में एक पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए कि क्या केंद्र डीजल के साथ इथेनॉल के मिश्रण को जरूरी करने की योजना बना रहा है, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा, “डीजल के साथ इथेनॉल के मिश्रण का मामला अभी भी प्रायोगिक चरण में है, और मैं साफ तौर पर कह सकता हूं कि फिलहाल शासनादेश की कोई योजना नहीं है.”आगे विस्तार से बताते हुए, मंत्री ने बोला कि इसका कारण यह है कि ऑयल विपणन कंपनियों ने ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इण्डिया और चुनिंदा मूल उपकरण निर्माताओं के योगदान से डीजल में 7 फीसदी तक इथेनॉल का परीक्षण किया है. उन्होंने आगे कहा कि प्रारंभिक परीक्षणों से पता चला है कि 5 फीसदी इथेनॉल मिश्रण के साथ फ्लैशपॉइंट में 15 डिग्री सेल्सियस की कमी होगी और हमें सामग्री अनुकूलता की जरूरत है. समान रूप से, ईंधन स्थिरता और ऑक्सीकरण स्थिरता. ईंधन टैंक में जमाव का निर्माण होगा और इसके बाद कई अन्य निहितार्थ भी होंगे.मंत्री ने यह भी कहा कि पेट्रोल के साथ इथेनॉल का मिश्रण अब 20 फीसदी तक के स्तर पर पहुंच गया है. उन्होंने बोला कि हमने 2014 में पेट्रोल में 1.4 फीसदी इथेनॉल मिश्रण के साथ आरंभ की थी. आज हम 15 प्रतिशत के आंकड़े पर पहुंच गये हैं. हम 400 करोड़ लीटर इथेनॉल मिश्रित कर रहे हैं. अब, यदि हमें डीजल को कम करना है, और हम इथेनॉल सम्मिश्रण साल 2025 के अंत तक इसे 1,000 करोड़ लीटर तक ले जाने की योजना बना रहे हैं.
डीजल के साथ इथेनॉल का मिश्रण कब से होगा अनिवार्य: मोदी सरकार ने संसद में दी ये बड़ी जानकारी
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