भारतीय वायुसेना के नवप्रशिक्षित अधिकारियों से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि उन्हें भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के लिए तैयार रहना चाहिए, क्योंकि आधुनिक युद्ध का स्वरूप तेजी से परिवर्तित हो रहा है। हैदराबाद स्थित एयर फोर्स अकादमी में आयोजित 217वें संयुक्त स्नातक परेड समारोह में उन्होंने अधिकारियों को संबोधित करते हुए तकनीक, नवाचार और अनुकूलन क्षमता के महत्व की ओर ध्यान दिलाया।
राजनाथ सिंह ने प्रशिक्षण पूरा करने वाले कैडेट्स को उनके उज्ज्वल सैन्य करियर की शुरुआत के लिए बधाई दी और उन्हें बदलते सुरक्षा माहौल के अनुरूप खुद को तैयार रखने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वायुसेना हमेशा से देश की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाती आई है। कश्मीर एयरलिफ्ट अभियान और 1971 के युद्ध में वायुसेना के योगदान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इन अभियानों ने भारत की रक्षा क्षमता को सशक्त किया।
रक्षा मंत्री ने हाल ही में संपन्न हुए ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए वायुसेना की सटीक योजना और प्रभावी क्रियान्वयन की प्रशंसा की। उनका कहना था कि किसी भी सैन्य अभियान की सफलता आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षित मानव संसाधन के संतुलित उपयोग पर निर्भर करती है।
संपूर्ण सैन्य परिदृश्य में तकनीकी प्रगति की ओर इशारा करते हुए, उन्होंने बताया कि आज के युद्धों में ड्रोन, सैटेलाइट, सेंसर, साइबर सिस्टम और रोबोटिक तकनीकों की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है। इसके साथ ही भविष्य में साइबर हमले और डिजिटल नेटवर्क पर खतरे भी बड़ी चुनौती बन सकते हैं, जिसके लिए सैन्य अधिकारियों को तकनीकी और साइबर क्षमताओं में दक्ष होना होगा।
राजनाथ सिंह ने विश्वास जताया कि एयर फोर्स अकादमी में प्राप्त प्रशिक्षण युवा अधिकारियों को भविष्य की जटिल और अप्रत्याशित परिस्थितियों का सामना करने में सक्षम बनाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि वही सेनाएं आगे रहेंगी जो नई तकनीकों को समय रहते अपनाकर उन्हें अपनी रणनीति का हिस्सा बनाएंगी।