प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के साथ सामान्य द्विपक्षीय संबंधों के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता को आवश्यक करार देते हुए मंगलवार को बोला कि हिंदुस्तान अपनी संप्रभुता और गरिमा की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार और प्रतिबद्ध है. उन्होंने यह भी बोला कि संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने, कानून के शासन का पालन करने और मतभेदों और विवादों के शांतिपूर्ण निवारण में हमारा मूल विश्वास है.
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने अमेरिका दौरे की आरंभ से पहले ‘वाल स्ट्रीट जर्नल’ को दिए एक इंटरव्यू में यह बातें कहीं. भारत-अमेरिका संबंधों पर पीएम ने बोला कि नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच संबंध पहले से कहीं अधिक मजबूत और गहरे हैं. दोनों राष्ट्रों के नेताओं के बीच ‘अभूतपूर्व विश्वास’ है.
वैश्विक राजनीति के बारे में मोदी ने बोला कि हिंदुस्तान कहीं उच्च, गहरी और व्यापक स्तर की किरदार का हकदार है. उन्होंने यह भी बोला कि हम हिंदुस्तान को किसी राष्ट्र की स्थान लेने के रूप में नहीं देखते. हम इस प्रक्रिया को हिंदुस्तान के दुनिया में अपना ठीक जगह हासिल करने के रूप में देखते हैं. उन्होंने कहा, ‘आज की दुनिया पहले से कहीं अधिक परस्पर जुड़ी हुई और एक-दूसरे पर निर्भर है. लचीलापन पैदा करने के लिए, आपूर्ति शृंखलाओं में अधिक विविधीकरण होना चाहिए.’
रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर हिंदुस्तान की किरदार की आलोचना से जुड़े एक प्रश्न पर पीएम मोदी ने कहा, ‘कुछ लोग कहते हैं कि हम तटस्थ हैं. लेकिन हम तटस्थ नहीं हैं. हम शांति के पक्ष में हैं. दुनिया को पूरा विश्वास है कि हिंदुस्तान की सर्वोच्च अहमियत शांति है.’
मोदी ने बोला कि संयुक्त देश जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को बदलना चाहिए. संयुक्त देश सुरक्षा परिषद का हिस्सा बनने की हिंदुस्तान की ख़्वाहिश पर पीएम ने पूरे विश्व में शांति अभियानों में सैनिकों के योगदानकर्ता के रूप में राष्ट्र की किरदार की ओर इशारा किया. उन्होंने बोला कि परिषद की मौजूदा सदस्यता का मूल्यांकन होना चाहिए.