हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के विजयी होने के साथ ही पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह सीएम पद की दौड़में सबसे आगे बतायी जा रही हैं. पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू और मौजूदा विधानसभा में कांग्रेस पार्टी विधायक दल के नेता मुकेश अग्निहोत्री भी इस दौड़ में शामिल बताये जा रहे हैं. कांग्रेस पार्टी के लिए एक ऐसे नेता का सीएम के चेहरे के रूप में चुनाव करना चुनौतीपूर्ण है, जो पार्टी को आगे ले जाते हुए उसे एकजुट रख सके. कांग्रेस पार्टी ने शुक्रवार को यहां अपने सभी नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक बुलाई है और बैठक में कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष को कांग्रेस पार्टी विधायक दल (सीएलपी) नेता चुनने के लिए अधिकृत करने का प्रस्ताव पारित होने की आसार है.
वैसे तो प्रतिभा सिंह ने विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा और वह विधायक भी नहीं हैं, लेकिन उन्होंने राज्य भर में पार्टी के लिए व्यापक चुनाव प्रचार किया. वह अभी मंडी से सांसद हैं. वह निवर्तमान सीएम जयराम ठाकुर के गृह जिले मंडी से लोकसभा उपचुनाव जीती थीं. प्रतिभा सिंह के साथ पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह की विरासत भी है, जिन्होंने चार दशक से अधिक समय तक प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की कमान संभाली थी.
पार्टी सूत्रों ने दावा किया कि प्रतिभा सिंह को ज्यादातर विधायकों का समर्थन प्राप्त है, जो वीरभद्र सिंह के प्रति निष्ठावान रहे हैं. वीरभद्र सिंह लंबे समय तक इस पहाड़ी राज्य में कांग्रेस पार्टी के निर्विवाद नेता रहे थे. प्रतिभा सिंह के बेटे विक्रमादित्य भी शिमला ग्रामीण से विधायक निर्वाचित हुए हैं और वह भी सीएम पद के लिए आशावान हैं. हालांकि, कई लोग उन्हें इस शीर्ष पद के लिए बहुत कम उम्र का मानते हैं. सीएम पद की दौड़ में नदौन से विधायक सुक्खू और हरोली के विधायक अग्निहोत्री भी शामिल हैं. दोनों को आशा है कि पार्टी आलाकमान क्रमश: प्रदेश कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष एवं कांग्रेस पार्टी विधायक दल के नेता के रूप में उनके काम को ध्यान में जरूर रखेगा.
अग्निहोत्री ब्राह्मण नेता तो सुक्खू ठाकुर समुदाय से
अग्निहोत्री ने दावा किया कि विधायक दल के नेता के रूप में पिछले पांच वर्ष में उन्होंने विधानसभा में प्रमुखता से पार्टी का रुख रखा तथा गवर्नमेंट के फैसलों का विरोध किया एवं बीजेपी के ‘कुशासन’ को लोगों के सामने रखा. अग्निहोत्री ब्राह्मण नेता हैं, जबकि सुक्खू राज्य में प्रभावशाली ठाकुर समुदाय से हैं. पूर्व प्रदेश कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौड़ भी सीएम पद के लिए आशावन हैं । वह दावा कर रहे हैं कि उन्होंने पिछले कुछ वर्षों से गुटबाजी से जूझ रही पार्टी को एकजुट किया. वह बहुकोणीय मुकाबले में ठियोग सीट से चुनाव जीते.
आशा कुमारी, कौल सिंह ठाकुर हारे चुनाव
कुछ महीने पहले राठौड़ की स्थान प्रतिभा सिंह को पार्टी की हिमाचल प्रदेश इकाई का प्रमुख बनाया गया था. सीएम पद के लिए आशावान छह बार की विधायक आशा कुमारी एवं पूर्व प्रदेश कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष कौल सिंह ठाकुर इस बार चुनाव हार गये हैं. हिमाचल प्रदेश की राजनीति में प्रभावशाली रहे कई राज परिवारों का अब असर समाप्त हो रहा है और उनमें से बस दो ही चुनाव जीत पाये हैं, जबकि दो पराजित हो गए हैं. पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य शिमला ग्रामीण से 13,860 वोटों के अंतर से जीते, जबकि अनिरूद्ध सिंह कसुम्पटी विधानसभा सीट से विजयी रहे. विक्रमादित्य रामपुर बुशहर के पिछले राजपरिवार से आते हैं. अनिरूद्ध सिंह का कोटि के राजपरिवार से संबंध है. तरफ, पूर्व मंत्री और छह बार की विधायक आशाकुमारी इस बार अपनी डलहौजी सीट से हार गयीं. कुल्लू के राजपरिवार से आने वाले हितेश्वर सिंह बांजर सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव हार गये. निवर्तमान बीजेपी गवर्नमेंट में सीएम जयराम ठाकुर समेत 12 कैबिनेट मंत्री थे. गोविंद सिंह ठाकुर, रामलाल मरकंडा, राजिंदर गर्ग, राजीव सेजाल, सरवीण चौधरी और वीरेंद्र कंवर भी चुनाव नहीं जीत पाये.