अशोक गहलोत साफ सुथरी छवि के नेताओं में शामिल हैं. एक सीएम और एक संगठन आदमी के रूप में उनका अपना रिकॉर्ड रहा है. उन्हें सहयोगी सचिन पायलट के नेतृत्व में पार्टी के विद्रोह को दबाने का श्रेय दिया जाता है.
मीडिया रिपोर्टों ने सुझाव दिया है कि अंतरिम कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी चाहती हैं कि राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी का नेतृत्व करें. यदि सोनिया गांधी ने वास्तव में सुझाव दिया होता तो अशोक गहलोत ना नहीं कह पाते. कोई भी कांग्रेस पार्टी नेता गांधी को ना नहीं कहता (केवल एक गांधी पार्टी के नेताओं को ना कह सकता है. जैसे राहुल गांधी कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष बनने के लिए पार्टी के नेताओं के बीच के शोर को नजरअंदाज कर रहे हैं).
राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत से जब सोनिया गांधी से मुलाकात और कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष पद संभालने के आग्रह को लेकर प्रश्न किया गया, तो उन्होंने कहा- मेरी तो मुलाकात उनसे होती रहती है. थोड़ी देर पहले भी हुई। अब उनसे मुलाकात नहीं होगी, तो किससे होगी, नड्डा (बीजेपी अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा) से होगी. इसके साथ ही गहलोत ने बोला कि अभी मुझे 2 स्थान दी गई हैं, एक गुजरात की और दूसरी राजस्थान के सीएम की जो मैं पूरी ईमानदारी के साथ निभा रहा हूं. कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष की जो बात चल रही है उसकी एक प्रक्रिया होती है… हम चाहते हैं कि वो (राहुल गांधी) कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष बनें.
गहलोत ने बोला कि वह सिर्फ मीडिया से “यह सब” सुन रहे थे और वह उन्हें सौंपे गए कर्तव्यों को पूरा कर रहे हैं. राजस्थान के मुख्यमंत्री होने के अलावा, गहलोत इस वर्ष के अंत तक होने वाले गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी के वरिष्ठ पर्यवेक्षक भी हैं. गहलोत और सोनिया गांधी ने मंगलवार को मुलाकात की, जिसके एक दिन बाद उन्होंने बोला कि राहुल गांधी पार्टी के सर्वसम्मत नेता हैं. गहलोत ने सार्वजनिक रूप से यह साझा नहीं किया कि बैठक में क्या हुआ. गांधी के वफादार, गहलोत शायद पद के लिए बहुत महत्वाकांक्षी नहीं दिखना चाहते.
कांग्रेस अध्यक्ष पद वोटिंग
कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष के चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा कुछ दिनों में कर सकती है. यह तब है जब सोनिया गांधी मेडिकल चेक-अप के लिए विदेश में हैं और बोला रहा है कि वे पांच और सालों के लिए पूर्णकालिक पार्टी अध्यक्ष के रूप में लौटने के लिए अनिच्छुक हैं. पिछले 25 सालों में, कांग्रेस पार्टी का नेतृत्व सोनिया या राहुल गांधी करते आ रहे हैं. गांधी परिवार सीताराम केसरी के अनुभव को नहीं भूले हैं, जिन्होंने कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष बनने पर गांधी के कई वफादारों को दरकिनार कर दिया था. लेकिन यही कारण है कि यदि राहुल गांधी पार्टी अध्यक्ष नहीं बनते हैं तो यह वास्तव में कांग्रेस पार्टी की सहायता करेगा. यहां यह भी है कि यदि गहलोत 2024 में पार्टी का नेतृत्व करते हैं तो पार्टी को लाभ क्यों होगा.
अशोक गहलोत क्यों?
अशोक गहलोत साफ सुथरी छवि के नेताओं में शामिल हैं. एक सीएम और एक संगठन आदमी के रूप में उनका अपना रिकॉर्ड रहा है. उन्हें सहयोगी सचिन पायलट के नेतृत्व में पार्टी के विद्रोह को दबाने का श्रेय दिया जाता है. यह तब की बात है जब हाल के दिनों में राहुल के कई सहयोगी पार्टी छोड़ चुके हैं. गहलोत हिंदी भी जानते हैं और सियासी रूप से प्रासंगिक जाति से आते हैं. गहलोत के और भी लाभ होंगे. हिंदुस्तान के सियासी परिदृश्य में, पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी जैसे अन्य मोदी चुनौती देने वाले नेता राहुल को गंभीरता से नहीं लेते. लेकिन ममता और यहां तक कि बिहार के सीएम नीतीश कुमार जैसे लोग सोनिया गांधी से सौहार्दपूर्ण ढंग से मिलते हैं. यहीं पर सोनिया द्वारा चुने गए गहलोत को एक लाभ होगा. लेकिन इस बात में भी सच्चाई है कि यदि कांग्रेस2024 में काफी अच्छा प्रदर्शन करती है, तो गहलोत को पीएम बना दिया जाएगा. (हालांकि इसकी संभावान बहुत कम है) लेकिन उस स्थिति में, सिर्फ एक गांधी ही कुर्सी ले सकते हैं. हां, यदि गहलोत 2024 में पार्टी का नेतृत्व करते हैं तो इससे कांग्रेस पार्टी को सहायता मिलेगी.