प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण कार्यक्रम के लिए मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की हिंदुस्तान की संक्षिप्त यात्रा के दौरान हाथ मिलाने और शुभकामना संदेशों के बावजूद, दोनों राष्ट्रों के बीच संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं. हाल ही में, मालदीव की संसदीय समिति ने पिछली गवर्नमेंट द्वारा हिंदुस्तान के साथ हस्ताक्षरित चार समझौतों की जांच करने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया. इससे यह संकेत जा रहा है कि हिंदुस्तान मैं बैठकर भी मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू हिंदुस्तान के साथ अपने तनाव को समाप्त नहीं करना चाहते हैं. इसके अतिरिक्त हिंदुस्तान के पीएम मोदी के शपथग्रहण कार्यक्रम का भी लाइव प्रसारण मालदीव में अंतिम समय में रद्द कर दिया गया. दिल्ली में बैठ कर हिंदुस्तान गवर्नमेंट के साथ गलबहियां करने वाले मुइज्जू के आखिर क्या चाहते
मालदीव और भारत
इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, जांच के दायरे में आने वाले समझौतों में हिंदुस्तान और मालदीव के बीच हाइड्रोग्राफी समझौता, हिंदुस्तान द्वारा समर्थित उथुरु थिला फाल्हू डॉकयार्ड परियोजना और मानवीय और खोज एवं बचाव मिशनों के लिए मालदीव रक्षा बलों को हिंदुस्तान द्वारा उपहार में दिया गया डोर्नियर विमान शामिल हैं. यह प्रस्ताव 20वीं संसद की सुरक्षा सेवा समिति द्वारा पारित किया गया था, जिसे संसद 241 समिति के रूप में भी जाना जाता है, जिसका दावा है कि ये समझौते मालदीव की संप्रभुता और स्वतंत्रता के लिए खतरा पैदा करते हैं. समीक्षा का फैसला हिताधू सेंट्रल के सांसद अहमद अज़ान के प्रस्ताव के बाद लिया गया. ये समझौते राष्ट्रपति सोलिह के प्रशासन के दौरान हस्ताक्षरित किए गए थे.
हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण समझौता (Hydrographic survey agreement)
पिछले वर्ष दिसंबर में, राष्ट्रपति मुइज़ू के नेतृत्व वाली मालदीव गवर्नमेंट ने हिंदुस्तान के साथ हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण समझौते को नवीनीकृत नहीं करने का निर्णय किया, जो 7 जून, 2024 को खत्म हो गया. 8 जून, 2019 को पीएम मोदी की मालदीव यात्रा के दौरान, एक जरूरी हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण समझौते पर हस्ताक्षर किए गए. इस समझौते ने हिंदुस्तान को मालदीव के क्षेत्रीय जल का व्यापक सर्वेक्षण करने के लिए अधिकृत किया, जिसमें इसकी चट्टानें, लैगून, तटरेखाएँ, महासागरीय धाराएँ और ज्वार का स्तर शामिल है. सोनार जैसे उपकरणों से लैस जहाजों द्वारा किए जाने वाले हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण, जल निकायों के विभिन्न पहलुओं की जाँच करते हैं. जैसा कि यूएस नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा वर्णित किया गया है, ये सर्वेक्षण पानी की गहराई, समुद्र तल और तटरेखा के आकार, संभावित अवरोधों और अन्य भौतिक विशेषताओं का मानचित्रण करते हैं, जिससे समुद्री यातायात की सुरक्षा और दक्षता सुनिश्चित होती है.
मनीकंट्रोल के अनुसार, हाइड्रोग्राफी पर संयुक्त आयोग की पहली बैठक सितंबर 2019 में मालदीव में हुई थी. इसके बाद, 2021 के फरवरी और मार्च में, भारतीय नौसेना के जहाज दर्शक ने पहला संयुक्त हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण किया. यह सहयोगात्मक कोशिश 2021, 2022 और 2023 में किए गए तीन सर्वेक्षणों के साथ जारी रहा, जिसमें 944 वर्ग किलोमीटर को कवर किया गया, जिसमें 1853 से सर्वेक्षण नहीं किए गए क्षेत्र भी शामिल थे. इन सर्वेक्षणों में मल्टी-बीम इको साउंडर्स का इस्तेमाल किया गया और परफेक्ट ज्वार की भविष्यवाणी के लिए ज्वार माप शामिल थे. इन सर्वेक्षणों का प्राथमिक उद्देश्य नेविगेशनल चार्ट/इलेक्ट्रॉनिक नेविगेशनल चार्ट को अपडेट करना था, जिससे परफेक्ट और वर्तमान समुद्री जानकारी प्रदान करके पर्यटन, मछली पकड़ने और कृषि जैसे विभिन्न उद्योगों को फायदा हो.
उथुरु थिला फाल्हू डॉकयार्ड परियोजना (Uthuru Thila Falhu Dockyard Project)
फरवरी 2021 में, हिंदुस्तान और मालदीव ने औपचारिक रूप से उथुरु थिला फाल्हू नौसैनिक अड्डे पर एक तटरक्षक बंदरगाह और डॉकयार्ड विकसित करने पर सहमति व्यक्त की. इस समझौते पर मालदीव के रक्षा मंत्री मारिया अहमद दीदी और भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हस्ताक्षर किए थे. यह समझौता 2016 में मालदीव के तत्कालीन राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन अब्दुल गयूम द्वारा हिंदुस्तान यात्रा के दौरान स्थापित रक्षा कार्य योजना के ढांचे के अनुसार किया गया था. समझौते के दायरे में बंदरगाह और डॉकयार्ड का निर्माण, साथ ही जरूरी बुनियादी ढांचे का विकास शामिल है. हिंदुस्तान को संचार संसाधन, रडार सेवाएं और प्रशिक्षण सहायता बढ़ाने का भी काम सौंपा गया है. इन विकासों के बावजूद, मालदीव राष्ट्रीय रक्षा बल ने साफ किया कि कोई भी भारतीय सैन्यकर्मी बेस पर तैनात नहीं होगा. समझौते पर हस्ताक्षर के बाद संयुक्त बयान में बोला गया था कि अप्रैल 2013 में मालदीव गवर्नमेंट द्वारा हिंदुस्तान गवर्नमेंट से समर्थन और योगदान के लिए किए गए निवेदन के अनुसरण में समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे, ताकि मालदीव रक्षा बलों की क्षमता को बढ़ाने में सहायता मिल सके और अपने विशेष आर्थिक क्षेत्र और द्वीपों की समुद्री नज़र की जा सके.
डोर्नियर समुद्री नज़र विमान (Dornier Maritime Surveillance aircraft)
सितंबर 2020 में, मालदीव को भारतीय नौसेना से डोर्नियर समुद्री नज़र विमान मिला, जिसे दोनों राष्ट्रों के बीच रक्षा संबंधों में एक “बहुत बड़ा मील का पत्थर” बोला गया. विमान का उद्देश्य राष्ट्र को समुद्री और विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) निगरानी, मानवीय सहायता, आपदा और चिकित्सा राहत में सहायता करना था. इसके अलावा, इसका उद्देश्य उत्तरी एटोल में मालदीवियों की सहायता करना और विदेशी जहाजों की पहचान करना था. हालाँकि, जैसा कि अब स्थिति है, विमान द्वीपसमूह में बेकार पड़ा है और राष्ट्र में इसे उड़ाने के लिए कोई भी प्रशिक्षित नहीं है.
भारतीय सेना कर्मियों की हिंदुस्तान वापसी (Return of Indian military personnel to India)
राष्ट्रपति मुइज़ू की मांग के अनुसार, द्वीप देश में तैनात सभी 77 भारतीय सेना कर्मियों को इस वर्ष मई में वापस भेज दिया गया था.
आपको बता दें कि केंद्रीय मंत्री एस जयशंकर ने मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू, बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना और श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे के साथ सोमवार को द्विपक्षीय बैठकें कीं. मुइज्जू, हसीना और विक्रमसिंघे हिंदुस्तान के पड़ोस और हिंद महासागर क्षेत्र के उन सात राष्ट्रों के नेताओं में शामिल हैं, जो पीएम नरेन्द्र मोदी और उनके मंत्रिपरिषद के शपथ ग्रहण कार्यक्रम में रविवार को शामिल हुए. जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘नयी दिल्ली में आज मालदीव के राष्ट्रपति डाक्टर मोहम्मद मुइज्जु से मिलकर खुशी हुई. हिंदुस्तान और मालदीव के मिलकर काम करने की आशा करता हूं.’’ जयशंकर मोदी की पूर्ववर्ती कैबिनेट में विदेश मंत्री थे. उन्होंने रविवार को केंद्रीय मंत्री के तौर पर फिर से शपथ ली. मुइज्जु के पिछले वर्ष 17 नवंबर को मालदीव का राष्ट्रपति बनने के बाद यह उनकी पहली हिंदुस्तान यात्रा है. ऐसा माना जाता है कि मुइज्जु का रुख चीन समर्थक है. उनके मालदीव के राष्ट्रपति पद पर आसीन होने के बाद से हिंदुस्तान और मालदीव के संबंधों में भारी तनाव पैदा हो गया है.