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लोकतंत्र के किसी भी रूप के अनुसार, गवर्नमेंट और सत्ता लोगों के वोटों के विजेता के पास जाती है. लेकिन यह पाकिस्तानिस्तान था और जहां भिन्न-भिन्न नियम कानूनों के कारण लोकतंत्र से चुनी हुई सरकारर भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाती है. पाकिस्तानिस्तान की इमरान खान गवर्नमेंट संकट में हैं. इमरान खान (69) की पार्टी पीटीआई के सदन में 155 सांसद हैं. इमरान को करीब दो रेट्जन सांसदों की बगावत और योगदानी दलों की चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है. पाकिस्तानिस्तान के इतिहास में अब तक किसी भी प्रधानमंत्री को अविश्वास प्रस्ताव के जरिये नहीं हटाया गया है, लेकिन इस चुनौती का सामना करने वाले इमरान खान तीसरे प्रधानमंत्री हैं. इससे पहले इमरान खान ने अपनी पार्टी के मेम्बरों को कठोर आदेश दिया कि वह अवश्विास प्रस्ताव पर मतदान के दिन या तो सदन में अनुपस्थित रहें या फिर मतदान में भाग नहीं लें. अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान अप्रैल के पहले हफ्ते में होने की संभावना है. साल 2018 में ‘नया पाकिस्तानिस्तान’ बनाने का वादा करके इमरान सत्ता में इनकमे, लेकिन बेलगाम महंगाई पर नियंत्रण पाने में गवर्नमेंट की विफलता ने विपक्ष को गवर्नमेंट के विरूद्ध एक मौका दे दिया. पाकिस्तानिस्तान में अब तक कोई प्रधानमंत्री पांच वर्ष का कार्यकाल नहीं पूरा कर सका है.
पाकिस्तानिस्तान के किसी भी प्रधानमंत्री ने पूरा नहीं किया 5 वर्ष का कार्यकाल
अब तक 19 लोग पाकिस्तानिस्तान में प्रधानमंत्री कामालय जा चुके हैं और कोई भी अपना 5 वर्ष का कार्यकाल पूरा नहीं कर सका. मर्डरएं, मनमानी बर्खास्तगी, मार्शल लॉ और अविश्वास-वोट, हिंदुस्तान के पड़ोसी राष्ट्र का लोकतांत्रिक इतिहास अपने प्रधान मंत्री कार्यकाल के दृष्टिकोण से ऐसा दिखता है.
यह है पाकिस्तानिस्तान के अब तक के प्रधानमंत्री और उनका कार्यकाल
लियाकत अली खान (1947-1951) – पाकिस्तान पीएम लियाक़त अली खान की अक्टूबर 1951 में हत्या कर दी गयी थी
ख्वाजा नजीमुद्दीन (1951-1953) – पाकिस्तानिस्तान गवर्नमेंट को गवर्नर जनरल द्वारा भंग कर दिया गया था.
मोहम्मद अली बोगरा (1953-1955) – गवर्नर जनरल द्वारा भंग की गई गवर्नमेंट
चौधरी मोहम्मद अली (1955-1956) – चौधरी मोहम्मद अली ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया
हुसैन शहीद सुहरावर्दी (1956-1957) – हुसैन शहीद सुहरावर्दी ने अपने पद इस्तीफा दे दिया
इब्राहिम इस्माइल चुंरेटीगर (1957) – इब्राहिम इस्माइल को अविश्वास प्रस्ताव से हटाया गया
फ़िरोज़ खान नून (1957-1958) – राष्ट्रपति द्वारा मार्शल लॉ लागू करने के बाद गवर्नमेंट गिर गई
जनरल अयूब खान के नेतृत्व में पाकिस्तानिस्तान में 1958-1971 मार्शल लॉ लागू हुआ. उन्होंने प्रधान मंत्री और राष्ट्रपति के कामालयों दोनों को मिला दिया और प्रदेश और गवर्नमेंट दोनों के प्रमुख बन गए.
नूरुल अमीन (1971): हिंदुस्तान–पाकिस्तान युद्ध और बांग्लाराष्ट्र के गठन के बाद इस्तीफा दे दिया.
1971-1973 में जुल्फिकार अली भुट्टो ने ‘नए संविधान’ की घोषणा करते हुए राष्ट्रपति के रूप में काम किया.
जुल्फिकार अली भुट्टो (1973-1977): जुल्फिकार अली भुट्टो को जनरल जिया उल अधिकार द्वारा सैन्य तख्तापलट में हटाया गया
1977-1985: जनरल जिया उल अधिकार ने प्रधान मंत्री का पद खत्म कर दिया.
मोहम्मद खान जुनेजो (1985-1988): जनरल जिया उल अधिकार द्वारा बर्खास्त.
बेनजीर भुट्टो (1988-1990): राष्ट्रपति अधीन इशाक खान द्वारा बर्खास्त.
नवाज़ शरीफ़ (1990-1993): राष्ट्रपति अधीन इशाक खान ने बर्खास्त कर दिया.
बेनज़ीर भुट्टो (1993-1996): राष्ट्रपति फारूक लेघारी द्वारा बर्खास्त.
नवाज़ शरीफ़ (1997-1999): जनरल परवेज मुशर्रफ़ द्वारा सैन्य तख्तापलट में उखाड़ फेंका गया.
1999-2002: पाकिस्तानिस्तान में किसी भी प्रधान मंत्री ने जनरल जिया उल अधिकार के उल्टा, जनरल मुशर्रफ ने इस पद को खत्म नहीं किया था.
जफरुल्लाह खान जमाली (2002-2004): इस्तीफा दे दिया.
चौधरी शुजात हुसैन (2004): पद छोड़ दिया.
शौकत अजीज (2004-2007): संसदीय चुनाव के समय कामालय छोड़ दिया.
यूसुफ रज़ा घिलानी (2008-2012): उच्चतम न्यायालय द्वारा अयोग्य घोषित.
राजा परवेज अशरफ (2012-2013): संसदीय चुनाव के समय कामालय छोड़ दिया.
नवाज़ शरीफ़ (2013-2017): उच्चतम न्यायालय ने अयोग्य ठहराया.
शाहिद खाकान अब्बासी (2017-2018): संसदीय चुनाव के समय कामालय छोड़ दिया.
इमरान खान (2018-उपस्थिता): 31 मार्च, 2022 को अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ेगा.