फ्री रेवड़ी पर नीतीश कुमार का तंज
गुजरात के चुनाव में अरविंद केजरीवाल फ्री बिजली की बात खूब कर रहे हैं। वह दिल्ली और पंजाब का उदाहरण भी दे रहे हैं. इसी बीच नीतीश कुमार ने निःशुल्क बिजली को लेकर आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल पर तंज किया है. उन्होंने बोला कि जनता को फ्री में बिजली देने का कोई मतलब नहीं है. फ्री में मिलने से बिजली का दुरुपयोग होने लगता है. अब साफ नजर आ रहा है कि अरविंद केजरीवाल और नीतीश कुमार का सुर-ताल मिलने वाला नहीं है. एक तरफ अरविंद केजरीवाल फ्रीबीज के हिमायती हैं तो दूसरी तरफ नीतीश कुमार इसे बेमतलब बताते हैं.
ऐसा पहली बार नहीं है जब नीतीश कुमार ने अरविंद केजरीवाल पर तंज कसा है. इससे पहले जब अरविंद केजरीवाल ने भारतीय नोट पर लक्ष्मी-गणेश की तस्वीर लगाने की बात की थी तब भी नीतीश कुमार इस पर हंसे थे. पत्रकारों के प्रश्न पर उन्होंने हंसते हुए बोला था, लोग क्या-क्या कहते रहते हैं. इस हिसाब से बोला जा सकता है कि नीतीश कुमार ने अरविंद केजरीवाल को जोड़ने का खयाल मन से निकाल दिया है. कुछ महीने पहले नीतीश कुमार ने अरविंद केजरीवाल से दिल्ली में मुलाकात भी की थी. लेकिन उनके बीच वार्ता का कोई नतीजा नहीं निकला. बाद में अरविंद केजरीवाल ने ही साफ कर दिया कि वह किसी भी ऐसा गठबंधन का हिस्सा नहीं होंगे जो बीजेपी को हराने के लिए बनाया गया हो.
कितना सफल होंगे नीतीश?
नीतीश कुमार ने 2024 के चुनाव के लिए विपक्ष को एकजुट करने का बीड़ा उठाया है. उन्होंने सोनिया गांधी, शरद पवार, केसीआर समेत कई दलों के शीर्ष नेताओं से मुलाकात की है. हालांकि अभी क्लियर नहीं है कि वह अपनी मुहिम में कितना सफल होंगे. ममता बनर्जी से लेकर केसीआर तक बीजेपी के विरूद्ध माहौल बनाने में लगे हुए हैं. हालांकि बात करें कांग्रेस पार्टी की तो पार्टी साफ कर चुकी है कि उसके छाते के नीचे बाकी दलों को आना होगा. अब देखना यह है कि कौन-कौन से दल कांग्रेस पार्टी की अगुआई में चुनाव लड़ने के लिए तैयार होंगे.
कैसी होगी विपक्षी एकता की शक्ल?
नीतीश कुमार और ममता बनर्जी की कवायद कितनी सफल होगी, यह साफ नहीं है. इस समय एआईएमआईएम भी सभी राज्यों में अपनी किस्मत आजमा रही है. उसके पास मुस्लिमों का बड़ा वोट बैंक भी है. लेकिन नीतीश कुमार और ओवैसी एक दूसरे से दूरी बनाए हुए हैं. संभव है कि ओवैसी सेक्युलर गठबंधन में शामिल ना हों. वहीं बीएसपी चीफ मायावती भी विपक्ष के साथ आने का कोई संकेत नहीं दे रही हैं. और ना ही नीतीश कुमार इसके लिए कोशिश करते दिख रहे हैं. वर्तमान परिस्थिति में विपक्षी एकता की जो शक्ल नजर आ रही है उसमें ओवैसी, मायावती और अरविंद केजरीवाल नजर नहीं आ रहे हैं.