मुंबई, 29 जून: महाराष्ट्र में जारी सियासी संग्राम बुधवार रात को शिवसेना प्रमुख और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के इस्तीफे पर आकर खत्म हो गया। सुप्रीम कोर्ट में राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को 30 जून को सदन में बहुमत साबित करने के निर्देश को चुनौती देने की याचिका में मिले झटके के बाद उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद और MLC पद से इस्तीफे दे दिया। ऐसे में जानिए शिवसेना की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में क्या-क्या हुआ?
सुप्रीम कोर्ट में शिवसेना के मुख्य सचेतक सुनील प्रभु की ओर से याचिका दायर की गई थी, जिसमें राज्यपाल के फ्लोर टेस्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट में शाम को याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें बागी विधायक ग्रुप के नेता एकनाथ शिंदे की ओर से पेश सीनियर वकील नीरज किशन कौल ने तर्क देते हुए कोर्ट को बताया कि अयोग्यता की कार्यवाही का फ्लोर टेस्ट पर कोई असर नहीं पड़ता है। कोर्ट में वकील ने दलील देते हुए कहा कि बहुमत साबित करने में देरी से लोकतांत्रिक राजनीति को नुकसान होगा। आप फ्लोर टेस्ट में जितनी देरी करेंगे, लोकतांत्रिक राजनीति को उतना ही ज्यादा नुकसान होगा।
कोर्ट ने पूछा- बागी गुट में कितने विधायक हैं?
जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने नीरज किशन कौल से पूछा कि बागी गुट में कितने विधायक हैं? अधिवक्ता ने कहा कि 55 में से 39 विधायक है। इसलिए फ्लोर टेस्ट का सामना करने से घबराहट है। वहीं शिंदे गुट ने कहा कि बागी विधायक शिवसेना नहीं छोड़ रहे हैं। हम शिवसेना है, हमारे पास प्रचंड बहुमत है। इतना ही नहीं एकनाथ शिंदे की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि फ्लोर टेस्ट का सामना करने के लिए सीएम की इच्छा का ना होना, बताता है कि उन्होंने सदन में बहुमत खो दिया है।
शिवसेना के पास केवल 16 विधायक- शिंदे गुट
इसके बाद शिवसेना के बागी विधायक ग्रुप की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने बहस शुरू की। उनका कोर्ट से कहा कि जब भी सुप्रीम कोर्ट इतनी देर से बैठा है, यह फ्लोर टेस्ट को रोकने के लिए नहीं है, यह फ्लोर टेस्ट कराने के लिए है। यह पहली बार है जब फ्लोर टेस्ट को रोकने का अनुरोध किया गया है। सीनियर वकील मनिंदर सिंह का कहना है कि शिवसेना के पास केवल 16 विधायक हैं। हमारे पास 39 विधायक हैं।