भगौड़े व्यवसायी विजय माल्या (Vijay Mallya) को न्यायालय की अवमानना मुद्दे में उच्चतम न्यायालय 11 जुलाई को सजा सुनाएगा. जस्टिस यूयू ललित की प्रतिनिधित्व वाली, रवींद्र एस भट और पीएस नरसिम्हा की तीन जजों की बेंच सोमवार को निर्णय सुनाएगी. पीठ ने मुद्दे में 10 मार्च को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था. उच्चतम न्यायालय की ओर से वर्ष 2017 में विजय माल्या को दोषी ठहराया था.
मामले पर सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने बोला था कि माल्या यूनाइटेड किंगडम में एक स्वतंत्र आदमी की तरह व्यवहार करता है और उससे संबंधित कार्यवाही के बारे में कोई जानकारी सामने नहीं आ रही है. सजा पर निर्णय सुरक्षित रखने से पहले उच्चतम न्यायालय ने बोला था ‘हमें बताया गया है कि (माल्या के खिलाफ) ब्रिटेन में कुछ मुकदमे चल रहे हैं. हमें नहीं पता, कितने मुद्दे लंबित हैं. मामला यह है कि जहां तक हमारे न्यायिक अधिकार क्षेत्र का प्रश्न है तो हम कब तक इस तरह चल पाएंगे.’
वहीं, सुनवाई के दौरान माल्या के वकील बोला कि ब्रिटेन में रह रहे उनके मुवक्किल से कोई निर्देश नहीं मिल सका है इसलिए वह पंगु हैं और अवमानना के मुद्दे में दी जाने वाली सजा की अवधि को लेकर उनका (माल्या का) पक्ष रख पाने में निर्बल हैं. इससे पहले न्यायालय ने माल्या को दिए गए लंबे समय का हवाला देते हुए 10 फरवरी को सुनवाई की तारीख तय कर दी थी और भगोड़े व्यवसायी को पर्सनल तौर पर या अपने वकील के जरिए पेश होने का आखिरी मौका दिया था.
2017 में न्यायालय ने ठहराया था दोषी
माल्या को अवमानना के लिए 2017 में दोषी ठहराया गया था और उनकी प्रस्तावित सजा के निर्धारण के लिए मुद्दे को सूचीबद्ध किया जाना था. उच्चतम न्यायालय ने 2017 के निर्णय पर पुनर्विचार के लिए माल्या की ओर से पंजीकृत पुनरीक्षण याचिका 2020 में खारिज कर दी थी. कोर्ट ने अदालती आदेशों को धता बताकर अपने बच्चों के खातों में चार करोड़ $ ट्रांसफर करने को लेकर उन्हें अवमानना का दोषी माना था.