7 अगस्त को सुबह 9:18 बजे श्रीहरिकोटा से लॉन्च होगा SSLV
75 ग्रामीण सरकारी विद्यालयों की 750 छात्राओं ने तैयार किए 75 पेलोड
इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने नए उपग्रह को “गेम चेंजर” बताया
रोहिणी स्वामी
हालांकि प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी का वादा “राष्ट्रीय ध्वज को लेकर ‘गगनयान’ पर एक मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन प्रारम्भ करना था।” लेकिन इस परियोजना में देरी हुई है। हालांकि, इसरो का एसएसएलवी अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है क्योंकि इसे 500 किलोग्राम से कम वजन वाले उपग्रहों और पेलोड को पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित करने के लिए विकसित किया गया था। 7 अगस्त को सुबह 9:18 बजे इस श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च होगा।
‘भारत के सैटेलाइट बाजार के लिए बड़ी कामयाबी’
आज़ादी का अमृत महोत्सव के उत्सव के मद्देनजर एसएसएलवी में ‘आज़ादी सैट’ नामक एक सह-यात्री उपग्रह होगा, जिसमें देशभर के 75 ग्रामीण सरकारी विद्यालयों की 750 युवा छात्राओं द्वारा निर्मित 75 पेलोड शामिल होंगे। इस परियोजना को विशेष रूप से 75वें स्वतंत्रता दिवस समारोह पर वैज्ञानिक सोच को प्रोत्साहित करने और युवा लड़कियों को अंतरिक्ष अनुसंधान को अपने करियर के रूप में चुनने के लिए संकल्पित किया गया था।
इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने नए उपग्रह को “गेम चेंजर” बताया है जो हिंदुस्तान के इमर्जिंग स्माल सैटेलाइट बाजार में प्रवेश करने के सपनों को आगे बढ़ाएगा। ISRO के ऑफिसरों ने News18 को बताया कि SSLV मिनी, माइक्रो और नैनो उपग्रहों (10-500 किलोग्राम द्रव्यमान) को 500 किमी प्लानर कक्षा में लॉन्च करने में सक्षम है। एसएसएलवी का उद्देश्य पेलोड इमेजिंग के साथ एक बेहतर और प्रैक्टिकल सैटेलाइट को डिजाइन और विकसित करना है। यह वानिकी, जल विज्ञान, कृषि, मिट्टी और तटीय शोध के क्षेत्र में जरूरी जानकारी भी प्रदान करेगा।