All India District Legal Service Authorities First Meet: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यायपालिका (Judiciary) से आग्रह किया कि वह भिन्न-भिन्न जेलों में बंद और कानूनी सहायता का इन्तजार कर रहे विचाराधीन कैदियों की रिहाई की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने अखिल भारतीय जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों (All India District Legal Service Authorities) की पहली मीटिंग को संबोधित करते हुए बोला कि व्यापार की सुगमता और जीवन की सुगमता जितनी जरूरी है, न्याय की सुगमता भी उतनी ही अहम है। नेशनल लीगल सर्विस अथॉरिटी (National Legal Service Authority) और सभी डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विस अथॉरिटी (District Legal Services Authorities) इसमें बहुत बड़ी किरदार निभा सकते हैं।
विचाराधीन कैदियों को उपलब्ध कराई जाए कानूनी मदद
विचाराधीन कैदियों की रिहाई में लाई जाए तेजी
पीएम मोदी ने सम्मेलन में भाग लेने वाले जिला जजों से आग्रह किया कि वे विचाराधीन मामलों की समीक्षा संबंधी जिला-स्तरीय समितियों के अध्यक्ष के रूप में अपने दफ्तरों का उपयोग करके विचाराधीन कैदियों की रिहाई में तेजी लाएं।
प्रधानमंत्री मोदी ने की ये अपील
प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण ( (All India District Legal Service Authorities) ने इस मुद्दे में एक अभियान प्रारम्भ किया है। उन्होंने बार काउंसिल ऑफ इण्डिया से इस कोशिश में और अधिक वकीलों को जोड़ने का आग्रह किया।
उन्होंने बोला कि e-Courts Mission के अनुसार राष्ट्र में वर्चुअल न्यायालय (Virtual Court) प्रारम्भ किए जा रहे हैं। Traffic Violation जैसे अपराधों के लिए 24 घंटे चलने वाली न्यायालय ने काम करना प्रारम्भ कर दिया है। लोगों की सुविधा के लिए न्यायालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार भी किया जा रहा है।
पीएम मोदी ने बोला कि एक आम नागरिक संविधान में अपने अधिकारों से परिचित हो, अपने कर्तव्यों से परिचित हो, उसे अपने संविधान, और संवैधानिक संरचनाओं की जानकारी हो, Rules और Remedies की जानकारी हो, इसमें भी टेक्नोलॉजी एक बड़ी किरदार निभा सकती है।