सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को यूपी गवर्नमेंट से पूछा कि केंद्रीय मंत्री अजय कुमार मिश्रा के बेटे और लखीमपुर हिंसा के आरोपी आशीष मिश्रा को कब तक हिरासत में रखा जा सकता है? कोर्ट ने सत्र न्यायालय के न्यायाधीश से लखीमपुर खीरी में अक्टूबर 2021 में प्रदर्शनकारी किसानों को कुचलने के मुद्दे में कथित मर्डर और संबंधित अपराधों के मुकदमे की सुनवाई पूरी करने के लिए संभावित समय-सारिणी साफ करने के लिए कहा.
शीर्ष न्यायालय ने आशीष मिश्रा की जमानत याचिका का विरोध करते हुए क्राइम को “गंभीर” करार देने वाली यूपी गवर्नमेंट से यह भी बोला कि वह एसयूवी (स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल) में सवार तीन लोगों की मर्डर के सिलसिले में पंजीकृत दूसरे मुद्दे में स्थिति को लेकर एक हलफनामा पंजीकृत करे. इसी एसयूवी से कथित तौर पर किसानों को कुचल दिया गया था. न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ ने बोला कि आरोपी, पीड़ितों और समाज सहित सभी पक्षों के हितों में संतुलन साधने की आवश्यकता है.
पीठ ने कहा, “सवाल यह है कि हम उसको (आशीष मिश्रा को) कब तक हिरासत में रख सकते हैं. हमें यह देखना होगा कि जो आरोपी एक वर्ष से अधिक समय से कारागार के अंदर है, उसके भी अधिकार हैं. अब आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया है और आरोप तय किए जा चुके हैं. पीड़ितों और गवाहों के भी अपने अधिकार हैं. यहां तक कि समाज की भी मुद्दे में रुचि है. अब, हमें मुद्दे में सभी के अधिकारों को संतुलित करना होगा.” पीठ ने कार सवार लोगों की मर्डर के दूसरे मुद्दे की सुनवाई कर रहे अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश से भी बोला कि वह आरोप तय करने की वांछनीयता पर विचार करें.
शीर्ष न्यायालय के पंजीयक (न्यायिक) से अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, लखीमपुर खीरी को लिखने के लिए कहा, ताकि अन्य लंबित मामलों और पहले से ही अहमियत वाले मामलों को ध्यान में रखते हुए मुद्दे में मुकदमे के समाप्ति के लिए वह समय सारिणी का संकेत दे सकें. पीठ ने यूपी गवर्नमेंट की तरफ से पेश हुईं अतिरिक्त महाधिवक्ता गरिमा प्रसाद को बताया, “वह हमारे आदेश पर कारागार के अंदर है. हम उसे अनिश्चितकाल के लिए नहीं रख सकते, लेकिन प्रश्न यह है कि हम किस चरण में उनकी जमानत पर विचार करें.” प्रसाद ने बोला कि उसके (आरोपी के) विरूद्ध आरोप “काफी गंभीर” हैं और विस्तृत जांच के बाद शीर्ष न्यायालय द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने आरोप पत्र दाखिल किया था. इस पर पीठ ने बोला कि वैसे 212 गवाह हैं, इसलिए मुकदमे में समय लगेगा.
प्रसाद ने बोला कि मिश्रा की जमानत अर्जी खारिज कर दी गई है, सत्र न्यायालय ने आरोप तय कर दिए हैं और सुनवाई 16 दिसंबर से प्रारम्भ होनी है. उन्होंने कहा, “हमने मुद्दे के सभी प्रमुख गवाहों को सुरक्षा प्रदान की है.” पीठ ने बोला कि यह एक अच्छा कदम है और मुकदमे के दौरान कोई संवेदनशील गवाह सामने आता है, तो राज्य को उसको भी सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए. इसके साथ ही पीठ ने मुद्दे में सुनवाई की अगली तारीख 11 जनवरी तय की.
इससे पहले छह दिसंबर को निचली न्यायालय ने आशीष मिश्रा और 12 अन्य आरोपियों के विरूद्ध आपराधिक षड्यंत्र और अन्य संबंधित धाराओं में आरोप तय किए गये थे. इसके साथ ही मुकदमे की सुनवाई प्रारम्भ होने का रास्ता साफ हो गया था. कुल 13 आरोपियों पर भारतीय दंड विधान की धारा 147 (बलवा), 148 (धारदार हथियार लेकर बलवा करना), 149 (गैरकानूनी जमावड़े में शामिल किसी सदस्य द्वारा क्राइम किया जाना), 302 (हत्या), 307 (हत्या का प्रयास), 326 (खतरनाक आयुधों या साधनों द्वारा स्वेच्छापूर्वक हानि पहुंचाना), 427 (आर्थिक हानि पहुंचाना) और 120 (ख) (साजिश रचना) और मोटर गाड़ी अधिनियम की धारा 177 के अनुसार आरोप तय किए गए थे.