नई दिल्ली, 8 जून (आईएएनएस). विदेश मंत्री एस। जयशंकर ने कनाडा के ब्रैम्पटन शहर में पूर्व पीएम इंदिरा गांधी की मर्डर को दर्शाने वाली परेड फ्लोट के दृश्य सामने आने के बाद गुरुवार को उत्तर अमेरिकी राष्ट्र की कड़ी आलोचना करते हुए आश्चर्य जताया कि वह चरमपंथियों को स्थान क्यों देता है.
जयशंकर ने विदेश नीति के संदर्भ में पिछले नौ सालों में केंद्र की उपलब्धियों को उजागर करने के लिए एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, मुझे नहीं पता कि कनाडा ऐसा क्यों करता है. चरमपंथी तत्वों को स्थान देना उसके लिए ठीक नहीं है.
उन्होंने कहा, साफ तौर पर वोट बैंक की राजनीति की आवश्यकताओं के अतिरिक्त इसका क्या कारण हो सकता है, यह हम नहीं समझ पा रहे हैं. मुझे लगता है कि अलगाववादियों, चरमपंथियों, हिंसा की वकालत करने वाले लोगों को दी गई स्थान के बारे में एक बड़ा अंतर्निहित मामला है.
कनाडा गवर्नमेंट के एक अधिकारी द्वारा हिंदुस्तान पर अपने मामलों में दखल देने का आरोप लगाने के प्रश्न पर जयशंकर ने कहा, बल्कि हमें कनाडा के विरूद्ध खालिस्तानी तत्वों को दी जाने वाली स्थान पर शिकायतें हैं. यह उल्टा चोर कोतवाल को डांटे वाली बात हुई.
मंत्री ने आगे बोला कि खालिस्तानी तत्वों द्वारा हंगामा करने की ऐसी घटनाएं ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे कई अन्य राष्ट्रों में भी हुई हैं.
जयशंकर ने कहा, इन सभी राष्ट्रों से हमारा निवेदन है कि इन्हें गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए, क्योंकि ये सीमांत तत्व हैं और काफी कम संख्या में हैं.
इस बीच, कई भारतीय विद्यार्थियों के फर्जी प्रवेश के कारण कनाडा में निर्वासन का सामना करने के मामले पर जयशंकर ने बोला कि उन्हें किसी और के क्राइम के लिए दंडित नहीं किया जाना चाहिए.
विदेश मंत्री ने बोला कि विद्यार्थियों ने अच्छे विश्वास के साथ उन कॉलेजों में प्रवेश लिया और शोध किया और उन्हें दंडित करना अनुचित है.
जयशंकर ने कहा, कुछ समय से विद्यार्थियों का यह मामला है, जिसमें कनाडाई कहते हैं कि उन्होंने उस कॉलेज में शोध नहीं किया जिसमें उन्हें होना चाहिए था, और जब उन्होंने वर्क परमिट के लिए आवेदन किया तो वे कठिनाई में पड़ गए.
सैकड़ों भारतीय छात्र, मुख्य रूप से पंजाब से, कनाडा से निर्वासन का सामना कर रहे हैं, क्योंकि वहां के ऑफिसरों ने शैक्षणिक संस्थानों का दाखिला प्रस्ताव पत्र नकली पाया.
जयशंकर ने कहा, आरंभ से ही, हमने इस मुद्दे को उठाया है और हमारा बोलना है कि विद्यार्थियों ने नेक नीयत से पढ़ाई की है. यदि ऐसे लोग हैं जिन्होंने उन्हें गुमराह किया है, तो दोषी पक्षों के विरूद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए. एक विद्यार्थी को दंडित करना अनुचित है, जिसने अपना काम किया है. मुझे लगता है कि कनाडा के लोग भी स्वीकार करते हैं कि यदि किसी विद्यार्थी ने कोई गलत काम नहीं किया है तो यह अनुचित होगा. हम दबाव डालना जारी रखेंगे.