बिहार में विधानसभा चुनाव के बाद एनडीए के नेतृत्व में नई सरकार बन चुकी है। मुख्यमंत्री के तौर पर लगातार चौथी बार नीतीश कुमार की ताजपोशी हो चुकी है, लेकिन बिहार में राजनीतिक हलचल थमने का नाम नहीं ले रही। दरअसल, अब तक कई राजनीतिक दलों के विधायक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात कर चुके हैं। वहीं, बसपा विधायक ने तो जदयू का दामन भी थाम लिया। ऐसे में अटकलें लगने लगी हैं कि क्या सीएम नीतीश से मुलाकात का अगला नंबर कांग्रेस के विधायकों का है?
इन विधायकों ने सीएम से की मुलाकात
बता दें कि कुछ दिन पहले बसपा विधायक मोहम्मद जमां खान जदयू में शामिल हो गए थे। वहीं, निर्दलीय विधायक सुमित कुमार सिंह ने भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपना समर्थन दे दिया। इसके अलावा लोजपा के एकमात्र विधायक राज कुमार सिंह भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिल चुके हैं और उन्हें विकास पुरुष बता चुके हैं। 28 जनवरी को असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के सभी पांचों विधायक भी नीतीश कुमार से मिले, जिसके बाद कयासबाजी का दौर शुरू हो गया।
अपने विधायकों की संख्या बढ़ा रही जदयू
राजनीतिक जानकारों की मानें तो विधानसभा चुनाव में कम सीटों पर सिमटने के बाद जदयू अपने विधायकों की संख्या बढ़ाने में जुटी हुई है। इसके लिए जदयू अंदरखाने काफी तैयारी कर रही है। वहीं, गैर महागठबंधन के विधायकों का बारी-बारी से सीएम नीतीश कुमार से मिलना इन अटकलों को हवा दे रहा है। ऐसे में निगाहें कांग्रेसी विधायकों पर टिक गई हैं। सूत्रों का दावा है कि कांग्रेस के कई विधायक जदयू के संपर्क हैं। हालांकि, विधायकों की संख्या उतनी नहीं है, जितनी दलबदल के लिए जरूरी है। दरअसल, दलबदल कानून के दायरे से बाहर रहने के लिए कांग्रेस के कम से कम 13 विधायक एक साथ होने चाहिए।
कांग्रेस ने खारिज कीं अटकलें
कांग्रेस नेता प्रेमचंद्र मिश्रा ने अपने विधायकों के जदयू के संपर्क में होने की अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के विधायक एकजुट हैं। नीतीश कुमार और भाजपा के बीच इस वक्त शह और मात का खेल चल रहा है। नीतीश अपने विधायकों की संख्या बढ़ाना चाहते हैं, लेकिन वह अपने मंसूबे में सफल नहीं होंगे।
जदयू प्रवक्ता ने दी यह जानकारी जदयू प्रवक्ता अजय आलोक ने बताया कि नीतीश कुमार के साथ सभी राजनीतिक दलों के नेता काम करना चाहते हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि सीएम नीतीश के साथ काम करके ही जनता के विकास के लिए ईमानदारी से काम किया जा सकता है। साथ ही, उनका राजनीतिक भविष्य भी सुरक्षित रहेगा।