उपराज्यपाल के अधिकारों को लेकर केंद्र द्वारा जारी अध्यादेश पर हर राजनीतिक दल की अपनी दलील है. आम आदमी पार्टी ने इसे उच्चतम न्यायालय की अवमानना बताया है, जबकि राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने बोला कि उच्चतम न्यायालय के निर्णय के बावजूद केंद्र ने जता दिया कि आखिरी निर्णय उसी का होगा. वहीं, बीजेपी अध्यादेश काे ठीक ठहरा रही है. इस बीच, केंद्र गवर्नमेंट ने उच्चतम न्यायालय से निर्णय पर पुनर्विचार का आग्रह भी किया है.
अध्यादेश असंवैधानिक : केजरीवाल
दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने केंद्र के अध्यादेश को असंवैधानिक और लोकतंत्र के विरूद्ध बताते हुए शनिवार को बोला आप की गवर्नमेंट उच्चतम न्यायालय में इसे चुनौती देगी. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र ने सेवाओं के मुद्दे पर नियंत्रण को लेकर उच्चतम न्यायालय के साथ सीधे विवाद की स्थिति पैदा कर दी है. उन्होंने बोला कि वह विभिन्न दलों के नेताओं से मिलेंगे, जिससे यह विधेयक राज्यसभा में पारित न हो पाए. उधर, केंद्र गवर्नमेंट ने उच्चतम न्यायालय से आग्रह किया है कि वह दिल्ली में सेवा टकराव के मामले पर 11 मई के अपने निर्णय पर पुनर्विचार करे. सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता द्वारा पंजीकृत पुनर्विचार याचिका में बोला गया है कि फैसला में त्रुटियां हैं.
इससे ज़िम्मेदारी तय होगी : भाजपा
पटना : बीजेपी के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा, ‘हमें अध्यादेश लाना पड़ा, क्योंकि उच्चतम न्यायालय के निर्णय के कुछ दिनों के भीतर दिल्ली गवर्नमेंट ने 2010 बैच के आईएएस अधिकारी वाईके राजशेखर का ट्रान्सफर कर दिया, जो शीशमहल में अनियमितताओं की जांच कर रहे थे. इसलिए हमें ऐसी प्रणाली की जरूरत थी, जो पारदर्शी और जवाबदेह हो.’
सरकार ने जताया, आखिरी निर्णय उसी का : सिब्बल
राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने ट्वीट किया, ‘सुप्रीम न्यायालय ने गवर्नमेंट से बोला था- सेवाओं की बागडोर दिल्ली गवर्नमेंट को सौंप दें. गवर्नमेंट ने कहा, ‘आप रास्ते में आएंगे, तो भी हम यही कहेंगे कि आखिरी निर्णय हमारा है.’