अहमदाबाद में 2008 में हुए बम धमाकों के गुनाहियों को 13 वर्ष बाद आखिरकार सजा मिल गई. गुजरात की विशेष न्यायालय ने इस सीरियल बम ब्लास्ट के 38 गुनाहियों को सजा-ए-मृत्यु दी है. वहीं 11 लोगों को जीवन भर जेल की सजा सुनाई गई है. 26 जुलाई 2008 को 70 मिनट की अवधि में हुए 20 से ज्यादा बम धमाकों ने अहमदाबाद को हिला कर रख दिया था. इन हमलों में 56 लोगों की मृत्यु हो गई थी और 200 से अधिक घायल हुए थे. पुलिस ने दावा किया था कि आतंकी संगठन भारतीय मुजाहिदीन से जुड़े लोगों ने वर्ष 2002 में गुजरात दंगों (गोधरा काण्ड) का बदला लेने के लिए इन हमलों को अंजाम दिया था, जिसमें अल्पसंख्यक समुदाय के कई लोग मारे गए थे.
कौन है भारतीय मुजाहिदीन
बताया जाता है कि 26 जुलाई 2008 को ब्लास्ट से पांच मिनट पहले कई मीडिया संगठनों को भारतीय मुजाहिदीन नाम के एक संगठन से ईमेल मिला था, जिसमें कहा गया ‘जो चाहो कर लो, रोक सकते हो तो रोक लो. इस ईमेल ने सबको चौंका दिया था. कथित तौर पर आईएम के इस ईमेल में 2002 के गुजरात दंगों, और 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस का बदला लेने की बात कही गई. आईएम ने लश्कर-ए-तैयबा से बम विस्फोटों की उत्तरदायीी नहीं लेने का निवेदन किया था. अब तक इस संगठन का नाम बहुत नहीं सुना गया था. हालांकि कहा जाता है कि इस संगठन ने वर्ष 2007 में मीडिया के जरिए हिंदुस्तान में अपनी मौजूदि का एलान किया था.
धमाके के लिए क्या इस्तेमाल करते थे?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आईएम के अधिकतर आतंकी पहले छोटे स्तर के कार्यकर्ता के रूप में सिमी में भर्ती हुए थे. जाँच एजेंसियों के मुताबिक आईएम ने कथित तौर पर अपना पहला हमला वर्ष 2002 में ही कोलकाता के अमेरिकन सेंटर पर किया था. हालांकि तब तक इसका नाम सामने नहीं इनकमा था. कहा यह भी जाता है कि वर्ष 2003 से 2005 के बीच आईएम सबसे ज्यादा एक्टिव था और उसने IED के इस्तेमाल से कई स्थान हमले किए थे. IED और दूध की खाली केन को इस्तेमाल से किए गए धमाकों से जाँच एजेसियों को यह पता चला कि आईएम का सिग्नेचर मार्क यही है. उनके लिए IED के जरिये एक से ज्यादा धमाके करना सरल था, जिससे ज्यादा से ज्यादा जान-माल का हानि पहुंचाया जा सके. हालांकि वे दूसरे विस्फोटकों का भी इस्तेमाल करते रहे हैं.
कब लगा प्रतिबंध?
गवर्नमेंट ने जून 2010 में आईएम को आतंकी संगठन घोषित करते हुए उस पर प्रतिबंध लगा दिया था. नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी की 2014 में पंजीकृत की गई एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट में कहा गया कि पहली बार नवंबर 2007 में लखनऊ न्यायालय में हुए बम ब्लास्ट की उत्तरदायीी भारतीय मुजाहिदीन नाम के आतंकी सगठन ने ली थी. एक ईमेल सभी मीडिया हाउस को भेजा गया था जिसमें लखनऊ, वाराणसी और फैजाबाद में हुए धमाकों की उत्तरदायीी इस संगठन ने ली थी. भारतीय मुजाहिदीन ने बाद में 2005 दिल्ली ब्लास्ट, 2006 मुंबई ट्रेन ब्लास्ट, 2007 वाराणसी और हैरेटाबाद ब्लास्ट की उत्तरदायीी भी इसी तरह मेल भेजकर ली
सिमी का एक समूह है आईएम
पुलिस ने जाँच में निष्कर्ष निकाला कि आईएम प्रतिबंधित स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) का एक समूह था. 26 जुलाई की शाम करीब 6 बजकर 45 मिनट पर अहमदाबाद में पहला धमाका हुआ. इसके कुछ देर बाद इन 70 मिनट में 20 से ज्यादा धमाके हुए. इस दौरान अहमदाबाद में प्रदेश गवर्नमेंट के सिविल हॉस्पिटल, अहमदाबाद नगर निगम के एलजी हॉस्पिटल, बसों, खड़ी साइकिलों, कारों समेत कई स्थानों पर बम विस्फोट हुए और कुल 22 धमाके हुए.
कहां से हुई आरंभ?
कथित तौर पर आईएम की आरंभ वर्ष 2000 में कर्नाटक के भटकल कस्बे में हुई थी. विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में हिंदुस्तानीय खुफिया एजेंसियों की ओर से मिली जानकारी के हवाले से कहा गया है कि आईएम लश्कर-ए-तैयबा जैसे अन्य स्थापित समूहों की तरह एक सुव्यवस्थित संगठन नहीं है. बल्कि, यह इस्लामिक संगठनों का एक नेटवर्क है जिसमें स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) शामिल है और इसी ने इस संगठन की फंडिंग की. जिसका हरकत उल-जिहाद-ए-इस्लामी (हूजी) और आफताब अंसारी के आतंकी गुट से संबंध है.
आईएम ने अपने कैडर के तौर पर विराष्ट्रियों के बजाए हमेशा जगहीय मुसलमानों को तरजीह दी. इसमें कर्नाटक, महादेश और आंध्र प्रदेश के लोग शामिल थे जिसका मुख्य लक्ष्य इस्लाम के सिपाही बनकर हिंदुस्तान के विरूद्ध ‘पवित्र जंग’ शुरू करना था. रिपोर्टस के अनुसार जाँच में पता चला है कि आईएम ने अपने आरंभी दिनों में बांग्लाराष्ट्री आतंकी संगठन हरकत-उल-ए-इस्लामी की सहायता से इस संगठन का नाम आसिफ रजा कमांडो फोर्स रखा था, जिसका नाम बाद में भारतीय मुजाहिदीन में परिवर्तित हो गया.
धमाके के लिए क्या इस्तेमाल करते थे?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आईएम के अधिकतर आतंकी पहले छोटे स्तर के कार्यकर्ता के रूप में सिमी में भर्ती हुए थे. जाँच एजेंसियों के मुताबिक आईएम ने कथित तौर पर अपना पहला हमला वर्ष 2002 में ही कोलकाता के अमेरिकन सेंटर पर किया था. हालांकि तब तक इसका नाम सामने नहीं इनकमा था. कहा यह भी जाता है कि वर्ष 2003 से 2005 के बीच आईएम सबसे ज्यादा एक्टिव था और उसने IED के इस्तेमाल से कई स्थान हमले किए थे. IED और दूध की खाली केन को इस्तेमाल से किए गए धमाकों से जाँच एजेसियों को यह पता चला कि आईएम का सिग्नेचर मार्क यही है. उनके लिए IED के जरिये एक से ज्यादा धमाके करना सरल था, जिससे ज्यादा से ज्यादा जान-माल का हानि पहुंचाया जा सके. हालांकि वे दूसरे विस्फोटकों का भी इस्तेमाल करते रहे हैं.
कब लगा प्रतिबंध?
गवर्नमेंट ने जून 2010 में आईएम को आतंकी संगठन घोषित करते हुए उस पर प्रतिबंध लगा दिया था. नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी की 2014 में पंजीकृत की गई एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट में कहा गया कि पहली बार नवंबर 2007 में लखनऊ न्यायालय में हुए बम ब्लास्ट की उत्तरदायीी भारतीय मुजाहिदीन नाम के आतंकी सगठन ने ली थी. एक ईमेल सभी मीडिया हाउस को भेजा गया था जिसमें लखनऊ, वाराणसी और फैजाबाद में हुए धमाकों की उत्तरदायीी इस संगठन ने ली थी. भारतीय मुजाहिदीन ने बाद में 2005 दिल्ली ब्लास्ट, 2006 मुंबई ट्रेन ब्लास्ट, 2007 वाराणसी और हैरेटाबाद ब्लास्ट की उत्तरदायीी भी इसी तरह मेल भेजकर ली.