शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे विदर्भ के दो दिवसीय दौरे पर हैं. इस दौरान उन्होंने बोला है कि बीजेपी की ‘एक देश, एक दल’ योजना कभी स्वीकार नहीं की जाएगी. उन्होंने दावा किया कि पीएम नरेन्द्र मोदी का ‘‘करिश्मा’’ फीका पड़ता जा रहा है.
महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर गर्मा गयी है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने ‘शिवसेना’ नाम और पार्टी का चिह्न ‘धनुष और बाण’ राज्य के सीएम एकनाथ शिंदे के गुट को आवंटित करने के निर्वाचन आयोग के निर्णय के विरूद्ध पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे की याचिका पर 31 जुलाई को सुनवाई करने पर सोमवार को सहमति जताई है. हम आपको बता दें कि वकील अमित आनंद तिवारी ने याचिका को तुरन्त सूचीबद्ध किए जाने का निवेदन किया था जिसके बाद प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की पीठ ने बोला कि मुद्दे को 31 जुलाई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाता है. पीठ ने वकील अमित आनंद तिवारी को शिंदे धड़े द्वारा पंजीकृत उत्तर का प्रत्युत्तर देने की अनुमति देते हुए कहा, ‘‘इसे 31 जुलाई के लिए सूचीबद्ध किया जाता है. हम इस पर उसी दिन सुनवाई करेंगे.’’ हम आपको याद दिला दें कि शीर्ष न्यायालय ने 22 फरवरी को शिंदे से उत्तर मांगा था.
ठाकरे का विदर्भ दौरा
इस बीच, शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे विदर्भ के दो दिवसीय दौरे पर हैं. इस दौरान उन्होंने बोला है कि बीजेपी की ‘एक देश, एक दल’ योजना कभी स्वीकार नहीं की जाएगी. उन्होंने दावा किया कि पीएम नरेन्द्र मोदी का ‘‘करिश्मा’’ फीका पड़ता जा रहा है. राज्य के यवतमाल जिले के दिगरास में एक रैली को संबोधित करते हुए ठाकरे ने अजित पवार धड़े के नौ राकांपा विधायकों को महाराष्ट्र गवर्नमेंट में शामिल किये जाने का मामला उठाया और प्रश्न किया कि बीजेपी के दावे के मुताबिक यदि गवर्नमेंट के पास बहुमत है तो राष्ट्रवादी कांग्रेस (राकांपा) को ‘चुराने’ की आवश्यकता क्या थी. ठाकरे ने कहा, ‘‘एक देश, एक कानून समझा जा सकता है. लेकिन हम बीजेपी की एक देश, एक दल योजना कभी स्वीकार नहीं करेंगे.’’
उद्धव ठाकरे का नया वार
उन्होंने बोला कि (पिछले साल) कुछ निर्दलीय विधायकों के साथ शिवसेना के 40 विधायक बीजेपी के साथ चले गये. उन्होंने सवालिया लहजे में कहा, ‘‘उन्होंने (शिवसेना के शिंदे धड़े और निर्दलीयों समेत) दावा किया कि उनकी गवर्नमेंट के पास पूर्ण बहुमत है. यदि ऐसी बात है तो राकांपा को चुराने की क्या आवश्यकता थी?’’ पूर्व सीएम ठाकरे ने यह भी आरोप लगाया कि पुरानी सहयोगी बीजेपी ठाकरे नहीं, खाली शिवसेना को चाहती है. उन्होंने दावा किया, ‘‘भाजपा अब निरर्थकों की पार्टी बन गयी है.’’ उनका इशारा हाल में महाराष्ट्र में शिवसेना-भाजपा गवर्नमेंट में शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस (राकांपा) के नौ विधायकों के शामिल किये जाने की ओर था. ठाकरे ने बोला कि पीएम का ‘‘करिश्मा’’ फीका पड़ गया है, जो हाल के कर्नाटक विधानसभा चुनाव से समझ में आ गया है. ठाकरे ने कहा, ‘‘उन्होंने (मोदी ने) ‘बजरंग बली की जय’ का नारा जोरशोर से दिया लेकिन बजरंग बली ने पलटकर अपनी गदा से प्रहार किया तथा बीजेपी का कर्नाटक में सफाया हो गया.’’ उन्होंने बोला कि एक दल से कुछ नेताओं का दूसरे दल में चला जाना समझा जा सकता है लेकिन ‘‘लोकतंत्र में पूरी पार्टी चुरा लेने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.’’ ठाकरे ने कहा, ‘‘हमने चुनाव से पहले कुछ विधायकों को एक दल से दूसरे दल में जाते हुए देखा है. लेकिन एक पूरी पार्टी को निगले जाने पर रोक लगनी चाहिए. लोकतंत्र में हर दल को अपनी राय प्रकट करने की अनुमति दी जानी चाहिए भले ही वे सियासी विरोधी हों.’’ उन्होंने बोला कि एक समय था जब मतपत्रों के माध्यम से नई गवर्नमेंट बनती थी ‘‘लेकिन अब नई गवर्नमेंट खोखा के माध्यम से बनती है.’’
पूर्व सीएम ने कहा, ‘‘मध्य प्रदेश में मोदी ने बोला कि महाराष्ट्र में 70,000 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ और उन्होंने इसका ठीकरा राष्ट्रवादी कांग्रेस पर फोड़ा. कुछ ही दिनों में राकांपा का एक धड़ा गवर्नमेंट में शामिल हो गया. अब राकांपा नेता ने पीएम के साथ अपना फोटा साझा किया. यह किस प्रकार का हिंदुत्व है?’’ ठाकरे ने दावा किया कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अक्टूबर, 2019 में मुंबई में उनके आवास ‘मातोश्री’ में भेंट के दौरान अविभाजित शिवसेना के साथ ढाई-ढाई वर्ष तक सीएम का पद साझा करने का वादा किया था. उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन, 2019 में विधानसभा चुनाव के बाद उन्होंने अपना वादा कबूल करने से इंकार कर दिया, फलस्वरूप मैंने राकांपा एवं कांग्रेस पार्टी के साथ हाथ मिला लिया.’’ हम आपको बता दें कि जहां ठाकरे की रैली हुई वह क्षेत्र दिगरास शिवसेना विधायक और राज्य के मंत्री संजय राठौड़ का गढ़ है. राठौड़ सीएम एकनाथ शिंदे के खेमे में चले गए हैं.
उद्धव ठाकरे ने बोला कि यदि बीजेपी ने सीएम पद के बंटवारे पर 2019 के विधानसभा चुनाव से पहले लिए गए ‘‘फैसले’’ का सम्मान किया होता तो बीजेपी कार्यकर्ताओं को अब दूसरे दलों के लिए ‘‘कालीन’’ नहीं बिछानी पड़ती. यवतमाल में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए ठाकरे ने बीजेपी पर जोरदार निशाने साधे. महाराष्ट्र में अजित पवार और राष्ट्रवादी कांग्रेस (राकांपा) के कुछ अन्य विधायकों के पार्टी से बगावत करने तथा एकनाथ शिंदे नीत गवर्नमेंट में शामिल होने के एक हफ्ते बाद ठाकरे ने बोला कि वह यह देखने का इन्तजार कर रहे हैं कि बीजेपी अपनी ‘नयी टोली’ को कैसे संभालती है. उन्होंने यह भी बोला कि वह विदर्भ के अपने दौरे पर किसानों से जुड़े मामले उठाएंगे.
दूसरी ओर, बीजेपी ने उद्धव के इस दौरे पर निशाना साधते हुए बोला है कि जो आदमी सिर्फ दो बार ‘मंत्रालय’ (सचिवालय) गया था, वह विदर्भ का दौरा कर रहा है, इस पर ठाकरे ने बोला कि बीजेपी कुछ कहने के लायक नहीं है. उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा को दूसरों पर आरोप लगाने बंद करना चाहिए और जिन्हें उसने लिया है, उन्हें संभालना चाहिए. मुझे नहीं लगता कि बीजेपी इस बारे में कुछ कहने के लायक है. उसके पास हमें उपदेश देने का कोई अधिकार नहीं है. मैं केवल यह देखने का इन्तजार कर रहा हूं कि बीजेपी अपनी नई टोली को कैसे संभालती है.’’