हैदराबाद से सांसद ने बोला कि मेरे हिसाब से उच्च न्यायालय का फैसला क़ानून के मुद्दे में खराब था और क़ुरआन की बातों को गलत तरह से पढ़ा. इसके साथ ही उन्होंने बोला कि कर्नाटक की बच्चियां इसलिए हिजाब पहन रही क्योंकि क़ुरआन में अल्लाह ने उन्हें बोला है. बीजेपी ने बिना आवश्यकता के इसे मामला बनाया.
गौरतलब है कि आज कर्नाटक हिजाब मुद्दे को लेकर उच्चतम न्यायालय में सुनवाई हुई खंडित निर्णय आने के बाद से इसे प्रधान न्यायाधीश के पास भेज दिया गया है. इसके बाद एक बड़े पीठ का गठन होगा जो इस मुद्दे को लेकर अपना निर्णय सुनाएगा. दरअसल, कर्नाटक हिजाब बैन मामला जब उच्च न्यायालय में पहुंचा था तो न्यायालय ने इस पर प्रतिबंध हटाने से मना कर दिया था. उच्च न्यायालय के इसी आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गई थी और कई याचिकाएं पंजीकृत की गई थी. इन याचिकाओं पर आज सुनवाई हुई है. न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता ने उच्च न्यायालय के निर्णय के विरूद्ध पंजीकृत याचिकाओं को जाना खारिज कर दिया. वहीं, न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया ने उन्हें स्वीकार कर लिया और बोला कि क्या पहनना है यह पसंद का मामला है.
आपको बता दें कि एक जनवरी, 2022 को कर्नाटक के उडुपी में एक प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज की कुछ मुसलमान छात्राओं को हिजाब पहनकर कक्षाओं में जाने की अनुमति नहीं दी गयी. इसके बाद छात्राओं ने कॉलेज प्रशासन के विरूद्ध धरना प्रारम्भ कर दिया. बाद में इस मामले को सुलझाने के लिए कर्नाटक गवर्नमेंट ने जानकार समिति का गठन किया था. 31 जनवरी को छात्राओं ने हिजाब पर प्रतिबंध के विरूद्ध हाई कोर्ट का रुख किया और यह घोषणा करने की मांग की कि हिजाब पहनना हिंदुस्तान के संविधान के अनुसार गारंटीकृत मौलिक अधिकार है. पांच फरवरी को कर्नाटक गवर्नमेंट ने शैक्षणिक संस्थानों में समानता एवं अखंडता के अधिकार और सार्वजनिक प्रबंध का उल्लंघन करने वाले कपड़ों पर प्रतिबंध लगा दिया.