Trump Tariff Impact: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कनाडा और मैक्सिको के विरुद्ध लंबे समय से दी जा रही शुल्क की धमकी आखिरकार मंगलवार को लागू हो गई। ट्रंप प्रशासन मेक्सिको और कनाडा पर 25 फीसदी शुल्क लगा रहा है और यह मंगलवार से लागू हो गया है। अमेरिका ने चीन से सभी आयात पर शुल्क को दोगुना करके 20 फीसदी कर दिया है।
ट्रंप के टैरिफ वार से वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल मच गई है। हालांकि, एक्सपर्ट का बोलना है कि अमेरिका द्वारा चीन, मेक्सिको और कनाडा पर उच्च शुल्क लगाए जाने से भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में अपना निर्यात बढ़ाने में सहायता मिलने की आशा है।
एक्सपर्ट का बोलना है कि जिन क्षेत्रों को फायदा हो सकता है उनमें कृषि, इंजीनियरिंग, मशीन उपकरण, परिधान, कपड़ा, रसायन और चमड़ा शामिल हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान जब अमेरिका ने चीनी वस्तुओं पर उच्च शुल्क लगाया था, तो हिंदुस्तान चौथा सबसे बड़ा लाभ पाने वाले था।
अमेरिका को होने वाले निर्यात पर पड़ेगा असर
भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (फियो) के मनोनीत अध्यक्ष एस सी रल्हन ने कहा, “इससे कृषि, इंजीनियरिंग, मशीन उपकरण, परिधान, कपड़ा, रसायन और चमड़ा जैसे क्षेत्रों में भारतीय निर्यातकों को सहायता मिल सकती है।” शुल्क से चीन, मेक्सिको और कनाडा से अमेरिका को होने वाले निर्यात पर असर पड़ेगा क्योंकि इससे अमेरिकी बाजार में उनके उत्पादों की कीमतें बढ़ जाएंगी, जिससे वे कम प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे।
उन्होंने कहा, “भारतीय निर्यातकों को इन अवसरों का फायदा उठाना होगा।” आर्थिक अध्ययन संस्थान ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने भी बोला कि व्यापार युद्ध में वृद्धि से हिंदुस्तान को अपना निर्यात बढ़ाने और अमेरिकी कंपनियों से निवेश आकर्षित करने में सहायता मिलने की आशा है। इसमें बोला गया है कि चीनी उत्पादों पर उच्च शुल्क हिंदुस्तान के लिए अपने विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करने का अवसर प्रदान करते हैं।
भारत को बरतनी चाहिए सावधानी
जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने बोला कि ट्रंप इसकी शर्तों से असंतुष्ट थे और अपने पहले कार्यकाल के दौरान, 2018-19 में इसे यूएसएमसीए (अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा एफटीए) से बदल दिया। उन्होंने दावा किया कि नाफ्टा पुराना हो गया है और अमेरिकी मजदूरों को हानि पहुंचा रहा है।
श्रीवास्तव ने कहा, “अब, वह फिर से अपने ही इस कदम से नाखुश हैं और आज से कनाडा और मेक्सिको पर 25 फीसदी शुल्क लगा दिया है, जो यूएसएमसीए की शर्तों का उल्लंघन है। यह वार्ता के जरिये किए गए व्यापार समझौतों के प्रति उसकी उपेक्षा को उजागर करता है। ऐसी ही स्थिति से बचने के लिए, हिंदुस्तान को अमेरिका के साथ व्यापक एफटीए पर वार्ता करने में सावधानी बरतनी चाहिए।”
भारत मांग सकता है एक्स्ट्रा डिस्काउंट
उन्होंने कहा, “इससे भी बुरी बात यह है कि वार्ता की मेज पर अमेरिका, हिंदुस्तान से न सिर्फ़ शुल्क में कटौती की मांग कर सकता है, बल्कि अतिरिक्त रियायतें भी मांग सकता है, जैसे सरकारी खरीद खोलना, कृषि सब्सिडी कम करना, पेटेंट सुरक्षा को कमजोर करना और अप्रतिबंधित डेटा प्रवाह की अनुमति देना। हालांकि, हिंदुस्तान इन मांगों का दशकों से विरोध करता रहा है।”
श्रीवास्तव ने बोला कि “मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के जगह पर भारत, अमेरिका से अधिकतर औद्योगिक उत्पादों पर शुल्क खत्म करने का प्रस्ताव देकर अमेरिका को ‘शून्य-के-लिए-शून्य शुल्क’ समझौते पेश कर सकता है, बशर्ते अमेरिका भी भारतीय वस्तुओं के लिए ऐसा ही करे।”