पटना। बिहार में हिंदुओं के तीर्थस्थलों की बदहाली और वहां तीर्थयात्रियों के रहने के लिए गवर्नमेंट द्वारा कोई व्यवस्था नहीं किए जाने को लेकर बीजेपी ने विरोध जताई है। पूर्व विधायक और बीजेपी नेता मिथिलेश तिवारी ने प्रश्न उठाया कि अल्पसंख्यक कहे जाने वाले मुसलमानों के धार्मिक और सामाजिक कार्यों के लिए हज भवन का निर्माण कराया गया है, तो बहुसंख्यक हिंदुओं के लिए तीर्थभवन क्यों नहीं।
भाजपा नेता मिथिलेश तिवारी ने सोशल मीडिया पर अपने एक पोस्ट के जरिए बिहार गवर्नमेंट से मांग की है कि बहुसंख्यक हिंदू के तीर्थस्थानों पर तीर्थभवन का निर्माण कराया जाए। मिथिलेश तिवारी ने अपने फेसबुक पोस्ट में बोला है कि बिहार गवर्नमेंट ने राजधानी पटना में करोड़ों की लागत से अल्पसंख्यक समाज के धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों के संचालन के लिए हज भवन का निर्माण कराया है। यह स्वागत योग्य है। लेकिन अब बहुसंख्यक हिंदुओं की धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों के संचालन के लिए पटना और गया में बिहार गवर्नमेंट तीर्थभवन का निर्माण शीघ्र ही कराए। पूरी दुनिया से हिंदू अपने पुरखों का पिंडदान करने गया आते हैं, लेकिन गया में अभी तक सुविधाओं से पूर्ण तीर्थभवन गवर्नमेंट ने नहीं बनवाया है।
मिथिलेश तिवारी में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मांग करते हुए लिखा कि बिहार में पिछले 32 सालों से संस्कृत भाषा की उपेक्षा हो रही है। संस्कृत विद्यालय और शिक्षक राज्य गवर्नमेंट से लम्बे समय से आर्थिक सहायता की राह देख रहे हैं। लेकिन अभी तक निराशा ही हाथ लगी है। संस्कृत देव भाषा है इसलिए संस्कृत के बिना संस्कृति और हिंदू सनातन धर्म कैसे बचेगा? यह अत्यंत ही चिंता का विषय है। बिहार के विद्यार्थियों को वेद और ज्योतिष विद्या की शिक्षा हेतु बनारस और प्रयाग जाना पड़ता है तो बिहार में ये सुविधा क्यों नही।