कांग्रेस ने दावा किया है कि उसके आंतरिक लोकतंत्र की किसी अन्य पार्टी में कोई समानता नहीं है और वह एकमात्र ऐसी पार्टी है जिसके पास संगठनात्मक चुनावों के लिए केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण है.
जब सारी दुनिया सो रही होगी तो हिंदुस्तान जीवन और आजादी की करवट के साथ उठेगा. 1947 में 14-15 अगस्त की मध्य रात्रि में नेहरू ने आजादी के सपनों की खुश्बों इन्ही सपनों के साथ बिखेरी थी. शायद उस समय राष्ट्र भी नेहरू के उन सपनों में भावी हिन्दुस्तान की तस्वीर देख रहा था. कांग्रेस पार्टी ने गुलामी की बेड़ियों में जकड़े हिन्दुस्तान को देखा है. आजादी की हवा में हिन्दुस्तान को सांस लेते देखा है. संविधान को बनते देखा है. संसद को बैठते देखा. जम्हूरियत को मजबूत होते देखा. स्वयं को टूटते हुए देखा है. संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन में अपने साथ दलों को जुड़ते हुए भी देखा है. सवा सौ वर्ष से हिन्दुस्तान को देखा है. इंग्लैंड की लेबर पार्टी, जमर्नी की सोशल डेमोक्रेट पार्टी और अमेरिका की डेमोक्रेटिक पार्टी की बराबरी करते कांग्रेस पार्टी ने स्वयं में एक इतिहास समेटा हुआ है. इतिहास 1885 के समय का जब मुंबई के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कालेज में कांग्रेस पार्टी की बुनियाद पड़ी. कांग्रेस पार्टी में समय समय पर किस तरह बगावत भड़की या मतभेदों के चलते पार्टी में खेमेबाज़ी हुई और नतीजा ये हुआ कि पार्टी किसी न किसी तरह टूटी. लेकिन लगभग 25 सालों के बाद कांग्रेस पार्टी गांधी परिवार से इतर किसी शख्स को पार्टी अध्यक्ष के रूप में चुनने के लिए तैयार है. जिसमें कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और शशि थरूर 17 अक्टूबर को एक ऐतिहासिक चुनावी मुकाबले में आमने-सामने होंगे.
चुनाव के बारे में जानने योग्य बातें
– 9,000 से अधिक प्रदेश कांग्रेस पार्टी कमेटी (पीसीसी) के प्रतिनिधि निर्वाचक मंडल गुप्त – मतदान में पार्टी प्रमुख का चुनाव करेंगे.
– जहां पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी और कांग्रेस पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के एआईसीसी मुख्यालय में मतदान करने की आशा है, वहीं राहुल गांधी कर्नाटक के संगनाकल्लू में हिंदुस्तान जोड़ो यात्रा शिविर में लगभग 40 अन्य यात्रियों के साथ मतदान करेंगे, जो पीसीसी के प्रतिनिधि हैं.
– किसी भी एआईसीसी महासचिव/राज्य प्रभारी, सचिवों और संयुक्त सचिवों को उनके नियत राज्य में वोट डालने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
– मतदान के बाद सीलबंद बक्सों को दिल्ली ले जाकर एआईसीसी मुख्यालय के स्ट्रांग रूम में रखा जाएगा.
– मिस्त्री ने बोला कि मतगणना प्रारम्भ होने से पहले मतपत्रों को मिलाया जाएगा ताकि किसी को पता न चले कि किसी उम्मीदवार को किसी विशेष राज्य से कितने वोट मिले हैं.
– कांग्रेस के 137 वर्ष के इतिहास में कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष का चुनाव छठी बार हो रहा है.
– पार्टी के शीर्ष पद के लिए अंतिम चुनावी मुकाबला 2000 में हुआ था जब जितेंद्र प्रसाद को सोनिया गांधी के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा था.
137 वर्ष में छठा चुनाव
कांग्रेस ने दावा किया है कि उसके आंतरिक लोकतंत्र की किसी अन्य पार्टी में कोई समानता नहीं है और वह एकमात्र ऐसी पार्टी है जिसके पास संगठनात्मक चुनावों के लिए केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण है. हालांकि ज्यादातर मौकों पर एक उम्मीदवार ने निर्विरोध जीत हासिल की है, लेकिन पार्टी के लंबे इतिहास में पांच बार ऐसा हुआ है जब चुनाव की जरूरत हुई थी.
1.) 1939 में महात्मा गांधी के उम्मीदवार पी सीतारमैया और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बीच एक चुनावी मुकाबला हुआ. बोस जीत गए.
3.) 1977 में लोकसभा चुनावों में हार के मद्देनजर पार्टी अध्यक्ष के रूप में देव कांत बरूआ के इस्तीफे के बाद के ब्रह्मानंद रेड्डी ने एआईसीसी प्रमुख के लिए पार्टी के चुनाव में सिद्धार्थ शंकर रे और करण सिंह को हराया.
4.) अगला चुनाव 20 वर्ष बाद हुआ जब 1997 में सीताराम केसरी ने शरद पवार और राजेश पायलट के साथ त्रिकोणीय मुकाबले में जीत हासिल की. महाराष्ट्र और यूपी के कुछ हिस्सों को छोड़कर, सभी राज्य कांग्रेस पार्टी इकाइयों ने केसरी का समर्थन किया था. उन्होंने पवार के 882 और पायलट के 354 के मुकाबले 6,224 प्रतिनिधियों के वोट पाकर भारी जीत दर्ज की थी.
5.) पांचवा मुकाबला 2000 में देखने को मिला जब जितेंद्र प्रसाद ने चुनाव में गांधी परिवार के सदस्य को चुनौती दी थी. प्रसाद को सोनिया गांधी के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा, जिन्होंने 7,400 से अधिक वोट हासिल किए, जबकि प्रसाद को कथित तौर पर 94 वोट मिले.
सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले अध्यक्ष
आगामी चुनाव निश्चित रूप से ऐतिहासिक होंगे क्योंकि नए अध्यक्ष सोनिया गांधी की स्थान लेंगे, जो सबसे लंबे समय तक पार्टी की अध्यक्ष रही हैं. 2017 से 2019 के बीच के दो सालों को छोड़कर जब राहुल गांधी ने पदभार संभाला था 1998 के बाद से वो इस शीर्ष पद पर हैं. स्वतंत्रता के बाद के युग में गांधी परिवार से संबंधित कुल 40 सालों से अधिक समय से पार्टी की कमान संभाली है. आजादी के बाद अब तक 16 लोगों ने पार्टी का नेतृत्व किया है, जिनमें से पांच गांधी परिवार के अध्यक्ष रहे हैं.
खड़गे बनाम थरूर
खड़गे को गांधी परिवार से उनकी कथित निकटता और वरिष्ठ नेताओं के समर्थन की वजह से मुख्य दावेदार बताया जा रहा है. वहीं इससे इतर थरूर ने स्वयं को परिवर्तन के उम्मीदवार के रूप में पेश किया है. प्रचार के दौरान भले ही थरूर ने प्रदेश के पार्टी नेताओं के दोहरे व्यवहार को लेकर इशारों-इशारों में नाराजगी जताई है. लेकिन बोला जा रहा है कि गांधी तटस्थ हैं और उनकी तरफ से कोई “आधिकारिक उम्मीदवार” नहीं है. खड़गे के अभियान में कई वरिष्ठ नेताओं, पीसीसी प्रमुखों और शीर्ष नेताओं को उनके द्वारा राज्य मुख्यालय में उनका स्वागत करते देखा गया है, थरूर का ज्यादातर पीसीसी प्रमुखों के साथ युवा पीसीसी प्रतिनिधियों द्वारा स्वागत किया गया है.