रूस-यूक्रेन अनाज निर्यात सौदा यदि लागू हुआ तो गरीब राष्ट्रों के लिए बड़े फायदा का मौका मिल सकता है. यूक्रेन अंतरराष्ट्रीय अनाज और तिलहन निर्यात बाजार में एक गौरतलब जगह रखता है. और इस प्रकार, निर्यात की रुकावट ने युद्ध प्रारम्भ होने के बाद से कृषि वस्तुओं की कीमतों में गौरतलब वृद्धि में सहयोग दिया है.
यदि रूस उस सौदे पर कायम रहता है, जिसमें उसने यूक्रेन के साथ अनाज निर्यात को फिर से प्रारम्भ करने की अनुमति दी है, तो इससे अनाज आयात करने वाले बहुत से देशों, जिनमें कई अफ्रीका के हैं, को बड़ी राहत मिल सकेगी.
राहत अपने आप में जरूरी होगी क्योंकि यूक्रेन में लगभग दो करोड़ 20 लाख टन अनाज (गेहूं, मक्का, सूरजमुखी के बीज और अन्य अनाज) भूमिगत भंडारगृहों में पड़ा है. वह रूस के आक्रमण के कारण इसे निर्यात बाजारों में भेजने में सक्षम नहीं है.
यूक्रेन अंतरराष्ट्रीय अनाज और तिलहन निर्यात बाजार में एक गौरतलब जगह रखता है. और इस प्रकार, निर्यात की रुकावट ने युद्ध प्रारम्भ होने के बाद से कृषि वस्तुओं की कीमतों में गौरतलब वृद्धि में सहयोग दिया है.
22 जुलाई 2022 को कीव और मास्को के बीच हस्ताक्षरित ‘‘अनाज सौदे’’ का उद्देश्य इस अराजक स्थिति को बदलना था.
समझौते के अनुसार रूस ने काला सागर क्षेत्र में अनाज के जहाजों पर हमला नहीं करने का वादा किया था. लेकिन यह वादा अधिक दिन नहीं चला. सौदे पर हस्ताक्षर के 24 घंटे से भी कम समय में रूसी मिसाइलों ने ओडेसा के जरूरी यूक्रेनी बंदरगाह पर हमला किया.
इस हमले से सौदे के कमजोर होने की आसार है. इसके अलावा, अनाज व्यापारी इस क्षेत्र में हाथ डालने से हिचक सकते हैं क्योंकि वे इसे बहुत जोखिम भरा मान सकते हैं. इससे सौदे का अमल में आना रूक सकता है.
लेकिन यदि रूस अपने वादे पर कायम रहता है, तो फायदा तुरन्त होगा. विश्व बाजार में अधिक अनाज की आपूर्ति मौजूद होने से अनाज की कीमतों में नरमी आ सकती है. कुल मिलाकर यह उपभोक्ताओं, विशेष रूप से गरीब विकासशील राष्ट्रों में रहने वाले लोगों के लिए एक अच्छा घटनाक्रम होगा.