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जानकारी में बताया गया है कि 7 जुलाई को विधान परिषद में समाजवादी पार्टी के सदस्यों की संख्या 9 रह गई है जो कि 100 सदस्य विधान परिषद की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमावली के मुताबिक गणपूर्ति की संख्या 10 से कम है. यही कारण है कि सभापति ने मुख्य विरोधी दल समाजवादी पार्टी के लाल बिहारी यादव को नेता प्रतिपक्ष के तौर पर मिली मान्यता को तुरन्त असर से खत्म कर दिया है.
लखनऊ. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद सपा के लिए सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है. पहले तो आजमगढ़ और रामपुर में सपा को उपचुनाव में करारी शिकस्त झेलनी पड़ी. इसके बाद सहयोगी दल लगातार आंखें दिखा रहे हैं. तो वहीं अब विधान परिषद में भी बड़ा झटका लग गया है. दरअसल, यूपी विधान परिषद में सपा के सदस्यों की संख्या घटकर 10 के नीचे आ गई है. इसका नतीजा यह हुआ है कि सपा के हाथ से नेता प्रतिपक्ष का पद भी चला गया है. जानकारी में बताया गया है कि 7 जुलाई को विधान परिषद में समाजवादी पार्टी के सदस्यों की संख्या 9 रह गई है जो कि 100 सदस्य विधान परिषद की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमावली के मुताबिक गणपूर्ति की संख्या 10 से कम है. यही कारण है कि सभापति ने मुख्य विरोधी दल समाजवादी पार्टी के लाल बिहारी यादव को नेता प्रतिपक्ष के तौर पर मिली मान्यता को तुरन्त असर से खत्म कर दिया है. हालांकि सदन में वे सपा के नेता बने रहेंगे.उत्तर प्रदेश विधानपरिषद के प्रमुख सचिव राजेश सिंह द्वारा जारी एक बयान के अनुसार कि 27 मई को विधान परिषद में समाजवादी पार्टी 11 सदस्यों के साथ सबसे बड़ी पार्टी थी और साथ ही गणपूर्ति (कोरम)हेतु भी सक्षम थी. इसकी वजह से पार्टी के सदस्य लाल बिहारी यादव को नेता प्रतिपक्ष के तौर पर मान्यता प्रदान की गई थी. विधान परिषद में समाजवादी पार्टी के नेता लाल बिहारी यादव ने सभापति के निर्णय पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बोला कि विधान परिषद के सभापति द्वारा नेता प्रतिपक्ष की मान्यता खत्म करना गैर कानूनी, नियमों के उल्टा और असंवैधानिक है. यहां जारी एक बयान में यादव ने नियमों का हवाला देते हुए सभापति के निर्णय को गलत ठहराते हुए बोला कि नेता प्रतिपक्ष सदन में संपूर्ण विपक्ष का नेता होता है. सपा बड़ी पार्टी है; लेकिन नियमों का गलत हवाला देकर नेता प्रतिपक्ष की मान्यता खत्म करना लोकतंत्र को कमजोर एवं कलंकित करने वाला कदम है. इस बारे में विधान परिषद के पूर्व नेता प्रतिपक्ष और समाजवादी पार्टी नेता संजय लाठर ने बोला कि सदन में सबसे बड़ी पार्टी के नेता को नेता प्रतिपक्ष बनाया जाता है, वैसे सपा सबसे बड़ी पार्टी हैं; इसलिए उसे नेता प्रतिपक्ष का पद दिया जाना चाहिए. उन्होंने बोला कि उनकी पार्टी इस मुद्दे पर न्यायालय का दरवाजा खटखटायेगी. गौरतलब है कि बृहस्पतिवार को विधान परिषद के 12 सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो गया. इसके साथ ही नेता प्रतिपक्ष का पद भी खत्म कर दिया गया. विधान परिषद के विशेष सचिव ने बृहस्पतिवार को इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है. कार्यकाल पूरा करने वाले सदस्यों में जगजीवन प्रसाद, बलराम यादव, डाक्टर कमलेश कुमार पाठक, रणविजय सिंह, राम सुंदर दास निषाद, शतरुद्र प्रकाश, अतर सिंह राव, दिनेश चंद्रा, सुरेश कुमार कश्यप और दीपक सिंह शामिल हैं. इनका जगह सात जुलाई से रिक्त घोषित कर दिया गया है. विधान परिषद के कुल 12 सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो गया है