देश में महंगाई पहले से ही निर्धारित अनुमान से ऊपर है और आम जनता इससे बेहाल है, लेकिन यह बोझ हाल-फिलहाल कम होता नजर नहीं आ रहा है. रिसर्च फर्म नोमुरा की रिपोर्ट में बोला गया है कि हिंदुस्तान में मुद्रास्फीति अपने उच्च स्तर पर है और आने वाले समय में यह और बढ़ने वाली है.
रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे उच्च महंगाई की मार झेल रहीं अर्थवयवस्थाओं में चार राष्ट्रों के नाम सबसे ऊपर हैं. इनमें हिंदुस्तान भी शामिल है. इसके अलावा, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया और ताइवान में भी मुद्रास्फीति उच्च स्तर पर बनी हुई है. रिपोर्ट में बोला गया है कि इस लिस्ट में शामिल राष्ट्रों को महंगाई काबू में करने के लिए कठोर कदम उठाने की जरूरत है. इन अर्थव्यवस्थाओं में आधारभूत मुद्रास्फीति तय दायरे के ऊपर है.
विशेषज्ञों ने जताया ये अनुमान
पिछले कुछ महीनों से भरत में हेडलाइन खुदरा मुद्रास्फीति लगातार बढ़ रही है और इसे नियंत्रित करने के लिए ही भारती रिजर्व बैंक आरबीअआई ने हाल ही में आनन-फानन में एमपीसी की बैठक कर नीतिगत दरों में 40 बेसिस प्वाइंट का वृद्धि कर दिया. इस वृद्धि के बाद 20 मई 2020 से चार प्रतिशत पर स्थित रेपो रेट बढ़कर 4.40 प्रतिशत हो गई. रिपोर्ट में जानकारों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में राष्ट्र में महंगाई अभी और भी बढ़ सकती है.
7.5 प्रतिशत पर पहुंच सकती है CPI
रिपोर्ट में बोला गया कि हिंदुस्तान की हेडलाइन मुद्रास्फीति में आधारभूत मुद्रास्फीति का हिस्सा 88 प्रतिशत है, जो कि एशिया में सबसे उच्च स्तरों में एक है. इसके अतिरिक्त एक पोल के परिणामों का जिक्र करते हुए बोला गया है कि अप्रैल महीने में राष्ट्र की खुदरा महंगाई 18 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच सकती है. इसका बड़ा कारण ईंधन और खाद्य पदार्थों की कीमतों आई तेजी है. 5 से 9 मई के बीच कराए गए इस पोल के मुताबिक, राष्ट्र में खुदरा महंगाई (CPI) अप्रैल महीने में 7.5 प्रतिशत पर पहुंच सकती है, जो मार्च में 6.95 प्रतिशत पर रही थी. बता दें कि खुदरा महंगाई के आंकड़े 12 मई को जारी किए जा सकते हैं.