Opposition Alliance: प्रचंड बहुमत से सत्ता में बैठी भारतीय जनता पार्टी को परास्त करने के लिए बने विपक्ष के इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इनक्लूसिव एलायंस (इंडिया) की स्थिति डांवाडोल है। 19 दिसंबर को दिल्ली में संपन्न बैठक से पहले और बाद में आए बयानों से कई गंभीर विरोधाभास उभरकर सामने आ रहे हैं। भाजपा विरोधी मतों का मालिकाना हक खुद तक सुरक्षित रखने की कांग्रेसी चाह ने गठबंधन के मौजूदा स्वरूप में बने रहने पर संशय पैदा कर दिया है।
इसीलिए अब तक गठबंधन के संयोजक के नाम पर दुविधा बनी हुई है। प्रधानमंत्री के चेहरे को लेकर भी विवाद उठ खड़ा हुआ है। सबसे बड़ा विपक्षी दल होने के नाते फिलहाल गठबंधन का नेतृत्व कांग्रेस के पास है। विपक्षी गठबंधन के नेताओं को अगले दस दिनों में आगामी लोकसभा चुनाव के लिए सभी 543 सीटों पर बीजेपी से मुकाबला कर सकने वाले मजबूत उम्मीदवार ढूंढने हैं। उन पर पंद्रह जनवरी तक अंतिम निर्णय कर लेना है, ताकि चुनाव तैयारी के लिए उम्मीदवार व दलों को कम से कम तीन महीने का समय तो मिल पाए। विपक्षी धुरी के वरिष्ठ नेता मानते हैं कि इस असाध्य लक्ष्य का पूरा हो पाना किसी चमत्कार से कम नहीं होगा, क्योंकि गठबंधन के 28 दलों का चरित्र एक सा नहीं है। अलग अलग राज्यों में अलग अलग दलों की सरकारें हैं, अलग अलग किस्म की चुनौतियां हैं।
विपक्षी गठबंधन का नेतृत्व कर रही कांग्रेस ने पिछले महीने अकेले दम पर विधानसभा चुनाव लड़कर जीत हार का अनुभव ले लिया है। उम्मीद के लिए तेलंगाना विधानसभा चुनाव का ताजा परिणाम सामने है। कांग्रेस पार्टी ने बीच चुनाव में दो बार के मुख्यमंत्री केसीआर के खिलाफ “बीजेपी की बी टीम” होने की डुगडुगी बजाई। मतदाताओं को सप्रमाण समझाया कि चंद्रशेखर राव बीजेपी से मिले हुए हैं। राव का तीसरी बार मुख्यमंत्री होना राज्य में बीजेपी के परोक्ष शासन को स्वीकार करना है। यह बात मतदाताओं को समझ में आ गई। अल्पसंख्यक और प्रखर बीजेपी विरोधी मतदाता कांग्रेस के पक्ष में एकत्रित हो गये।