Women’s reservation bill latest news: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने संसद के विशेष सत्र में मंगलवार को ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम बिल’ पेश करके ढाई दशक पुरानी मांग को लेकर एक नई उम्मीद जगाई है।
क्योंकि, संसद से लेकर राज्य विधानसभाओं तक में अभी महिलाओं की जो भागीदारी है, वह उनकी आबादी के मुकाबले कुछ भी नहीं है। लोकसभा और राज्यसभा और राज्य विधानसभाओं में महिला सदस्यों की संख्या उनकी जनसंख्या के मुकाबले कुछ भी नहीं है।
संसद में महिलाओं का अभी कितना है प्रतिनिधित्व? मसलन, लोकसभा की कुल 543 सीटों में से 2019 में 78 महिला सांसद चुनी गई थीं। जबकि, राज्यसभा के कुल 238 सांसदों में महिला सदस्यों की संख्या इस समय मात्र 31 है। महिलाओं को 33% आरक्षण देने वाला नया विधेयक पास हो जाने के बाद लोकसभा में देश की 181 संसदीय सीटें पूरी तरह से महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएंगी।
कुछ पिछड़े राज्यों का रिकॉर्ड अमीर राज्यों से बेहतर लेकिन, अगर हम राज्य विधानसभाओं का तुलनात्मक अध्ययन करें तो कई अमीर राज्य इस मामले में काफी पिछड़े हैं। सबसे पहले हम उन राज्यों की बात करते हैं, जो आर्थिक तौर पर तो पिछड़े माने जाते हैं, लेकिन महिलाओं को विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व देने के मामले में अमीर राज्यों से कहीं बेहतर स्थिति में हैं।