UN Russia Ukraine: संयुक्त देश महासभा ने यूक्रेन के चार क्षेत्रों में रूस के ‘अवैध कब्जे के प्रयास’ की निंदा करने और इन कदमों को तुरन्त वापस लिए जाने की मांग के पक्ष में अभूतपूर्व मतदान किया है. इस मतदान के जरिए पूरे विश्व के राष्ट्रों ने सात महीने से जारी युद्ध और रूस की अपने पड़ोसी राष्ट्र के क्षेत्र पर अतिक्रमण करने की प्रयास पर कड़ा विरोध जताया है. संयुक्त देश के 193 सदस्यों में से 143 ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया है.
वहीं पांच राष्ट्रों ने इसके विरोध में मत दिया, जबकि हिंदुस्तान समेत 35 राष्ट्र मतदान में अनुपस्थित रहे. यह प्रस्ताव रूसी बलों द्वारा 24 फरवरी को यूक्रेन पर हमला किए जाने के बाद संयुक्त देश महासभा की ओर से यूक्रेन को दिया गया अब तक का सबसे बड़ा समर्थन और रूस के प्रति सबसे कड़ा विरोध है. संयुक्त देश में यूक्रेन के राजदूत सर्गीय किस्लित्स्या ने इस मतदान को ‘अद्भुत’ और ‘ऐतिहासिक क्षण’ बताया. वहीं अमेरिकी राजदूत लिंडा थॉमस ग्रीनफील्ड ने इसे ‘एक यादगार दिन’ करार दिया.
ईयू के राजदूत ने बड़ी कामयाबी बताया
यूरोपीय संघ के राजदूत ओलाफ स्कूग ने प्रस्ताव को ‘एक ऐसी बड़ी सफलता’ बताया, जो ‘रूस को एक कड़ा संदेश भेजती है कि वह अलग-थलग है और रहेगा.’ अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने एक बयान जारी कर बोला कि इस मतदान ने यह दिखाया है कि दुनिया ‘रूस को उसके उल्लंघनकारी कदमों के लिए जवाबदेह बनाने के वास्ते अब पहले से अधिक एकजुट और प्रतिबद्ध है.’ उन्होंने बोला कि यह ‘स्पष्ट संदेश है’ कि ‘रूस एक संप्रभु राष्ट्र को दुनिया के नक्शे से मिटा नहीं सकता’ और वह ‘बल प्रयोग से सीमाएं नहीं बदल सकता.’
यूक्रेन के दोनेत्स्क, लुहान्स्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया क्षेत्रों पर पिछले महीने अतिक्रमण करने की रूस की घोषणा के उत्तर में पश्चिमी राष्ट्रों द्वारा प्रयोजित यह प्रस्ताव पेश किया गया था. रूसी संसद के दोनों सदनों ने दोनेत्स्क, लुहान्स्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया क्षेत्रों को रूस का हिस्सा बनाने से जुड़ी संधियों को स्वीकृति दी थी. चारों प्रांतों में कथित जनमत संग्रह के बाद इस संधि पर मुहर लगा दी गई थी. इस जनमत संग्रह को यूक्रेन और उसके पश्चिमी सहयोगियों ने गैर कानूनी बताकर खारिज किया है.
वक्ताओं ने रखा अपना पक्ष
यूक्रेन पर इमरजेंसी विशेष सत्र में वक्ताओं ने दो दिन तक अपना-अपना पक्ष रखा. इस दौरान रूस पर संयुक्त देश चार्टर के अहम सिद्धांतों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया, जिसमें सदस्य राष्ट्रों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने का सिद्धांत भी शामिल है. कुल 143 राष्ट्रों ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, जबकि रूस, बेलारूस, उत्तर कोरिया, सीरिया और निकारागुआ ने इसके विरूद्ध मतदान किया. वहीं 19 अफ्रीकी देशों, दुनिया के सर्वाधिक जनसंख्या वाले दो राष्ट्रों चीन और हिंदुस्तान और पाक और क्यूबा समेत 35 राष्ट्रों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया है.
महासभा से अधिक ताकतवर सुरक्षा परिषद रूस के वीटो अधिकार के कारण यूक्रेन के मुद्दे में उसके विरूद्ध कोई कदम नहीं उठा पाई है. परिषद के प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी होते हैं, जबकि महासभा यूक्रेन पर युद्ध की निंदा करने वाले चार प्रस्ताव पारित कर चुकी है. हालांकि, महासभा में मतदान विश्व की राय को दर्शाता है, लेकिन यह कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है.