जापान के पूर्व पीएम शिंजो आबे की मर्डर के बाद पूरी दुनिया सदमे में है। जापान जैसे शांत राष्ट्र में कोई खूनखराबे की ऐसी वारदात को भी अंजाम दे सकता है, वहां के लोग इस बात पर विश्वास ही नहीं कर पा रहे हैं। वहां के सबसे मशहूर और चहेते राजनेता के ऊपर हुए इस तरह के हमले ने जापानी नागरिकों को सदमे में डाल दिया। दरअसल जापान ऐसा राष्ट्र है, जहां रहने वाले ज्यादातर लोग अपनी पूरी जीवन बिना बंदूक देखे ही गुजार देते हैं।
जापान में यदि बंदूक का लाइसेंस हासिल करना है तो उसको लेकर वहां कानून बहुत कठोर हैं। यहां किसी भी नागरिक को बंदूक का लाइसेंस लेने के लिए कड़ी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। शांत राष्ट्र होने के कारण और हिंसक वारदातों के कम होने के कारण लोग बहुत कम संख्या में ही आत्मरक्षा के लिए बंदूक का लाइसेंस लेते हैं। आबे पर जिस बंदूक से हमला किया गया था वह भी गैर लाइसेंसी हथियार बताया जा रहा है और देसी ढंग से उसे तैयार किया गया था।
शिंजो आबे पर हमला करने वाला कौन ?
शिंजो आबे को गोली मारने वाले शख्स नाम है तेत्सुया यामागामी है। सूत्रों के अनुसार हमला करने के बाद 41 वर्ष का तेत्सुया यामागामी मौके पर ही खड़ा रहा। शिंजो आबे के बॉडी गार्ड्स और पुलिस ने उसे मौके से ही हथियार के साथ अरैस्ट कर लिया। तेत्सुया यामागामी ने पुलिस की पूछताछ में बताया कि वह शिंजो आबे से खुश नहीं था और उसने उनकी मर्डर करने के मकसद से ही हमला किया था। जापानी रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि हमलावर तेत्सुया यामागामी सेल्फ डिफेंस फोर्स का पूर्व सदस्य था और उसने 2002 से 2005 तक सेल्फ डिफेंस फोर्स में काम किया था।
शांत जीवन जीने में विश्वास रखते हैं जापानी
जापान के विश्वविद्यालयों में कई राइफलरी क्लब हैं और जापानी पुलिस भी सशस्त्र हैं। इसके बावजूद भी जापान के लोग शांत जीवन व्यतीत करने में विश्वास रखते हैं। आपके लिए हम एक आंकड़ा निकालकर लाए हैं। इससे आप सबके लिए ये समझना और आसान हो जाएगा कि दरअसल जापान दुनिया के भिन्न भिन्न राष्ट्रों की अपेक्षा अधिक शांतिप्रिय क्यों माना जाता है। इस आंकड़े के अनुसार 12.58 करोड़ की जनसंख्या वाले जापान में पिछले वर्ष बंदूक से संबंधित सिर्फ 10 आपराधिक मुद्दे थे। इन घटनाओं में एक आदमी की मृत्यु हुई थी और चार घायल हुए थे। इनमें से आठ मुद्दे रैकेट से जुड़े हुए थे।
इस वर्ष यानी 2022 में राजधानी टोक्यो में बंदूक से संबंधित घटनाओं, चोटों या मृत्यु का कोई भी मामला दर्ज नहीं हुआ था। हालांकि, इस शहर से 61 बंदूकें जरूर बरामद की गई थीं, ऐसे में एक बंदूक से राष्ट्र के सबसे बड़े राजनेता की मर्डर ने पूरे जापान को झकझोर कर रख दिया है। पूर्व पीएम की मर्डर के बाद अब राष्ट्र के मंत्रियों की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है।