नई दिल्लीः पीएम मोदी की रूस यात्रा के बाद अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि आपस में जुड़ी दुनिया में “कोई भी युद्ध अब किसी से दूर नहीं है.” गार्सेटी ने इस बात पर बल दिया कि राष्ट्रों को न केवल शांति के लिए खड़ा होना चाहिए, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम भी उठाने चाहिए कि जो लोग शांतिपूर्ण ढंग से काम नहीं करते, उनकी युद्ध मशीनें “बे रोकटोक जारी नहीं रहें.” राजदूत ने यहां एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘और यही बात अमेरिका और हिंदुस्तान दोनों को मिलकर जानने की आवश्यकता है.’’ उन्होंने दिल्ली और वाशिंगटन के बीच एक मजबूत साझेदारी की भी वकालत की.
उनकी यह टिप्पणी यूक्रेन-रूस और इजरायल-गाजा सहित विश्व में चल रहे अनेक संघर्षों की पृष्ठभूमि में आई है. यहां एक रक्षा समाचार सम्मेलन में अपने संबोधन में उन्होंने भारत-अमेरिका संबंधों को गहरा, प्राचीन और व्यापक बताया. उन्होंने कहा, “आज जब हम अमेरिका-भारत रक्षा साझेदारी को देखते हैं तो मुझे लगता है कि यह अपने चरम पर गया है.” यह कार्यक्रम यहां ‘यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन’ (यूएसआई) में आयोजित किया गया था और इसमें कई रक्षा जानकारों ने भाग लिया था. गार्सेटी ने कहा, “हम केवल अपना भविष्य हिंदुस्तान में नहीं देखते और हिंदुस्तान सिर्फ़ अपना भविष्य अमेरिका में नहीं देखता, बल्कि दुनिया हमारे संबंधों में बड़ी चीजें देख सकती है.”
अमेरिका और हिंदुस्तान हर कठिन के विरुद्ध ताकतवर अवरोधक
राजदूत ने बोला कि आपात स्थिति में, चाहे वह प्राकृतिक आपदा हो या मानव-जनित युद्ध हो, “अमेरिका और हिंदुस्तान एशिया और दुनिया के अन्य भागों में आने वाली समस्याओं के विरुद्ध एक ताकतवर अवरोधक साबित होंगे.” उन्होंने कहा, “ हम सभी जानते हैं कि हम दुनिया में एक दूसरे से जुड़े हुए हैं, अब कोई युद्ध किसी से दूर नहीं है. हमें केवल शांति के लिए खड़े नहीं होना चाहिए बल्कि हमें यह सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए कि जो लोग शांतिपूर्ण नियमों का पालन नहीं करते, उनकी युद्ध मशीनें बेरोकटोक जारी न रह सकें.
यह बात अमेरिका और हिंदुस्तान दोनों को जाननी चाहिए.” अपने संबोधन में उन्होंने जून 2023 में पीएम नरेन्द्र मोदी की अमेरिका की ऐतिहासिक राजकीय यात्रा का भी जिक्र किया. भारत-अमेरिका के बीच समानता के विभिन्न क्षेत्रों और इनकी संभावनाओं को रेखांकित करते हुए राजदूत ने कहा, “भारत अपना भविष्य अमेरिका के साथ देखता है, अमेरिका अपना भविष्य हिंदुस्तान के साथ देखता है.”