NATO and Japan: रूस और यूक्रेन के बीच जंग जारी है. ‘नाटो’ राष्ट्रों की सहायता से यूक्रेन अब रूस के पसीने छुड़वा रहा है. यूरोप और अमेरिका के राष्ट्रों से मिलकर बना ग्रुप ‘नाटो’ यूक्रेन को सेना और आर्थिक सहायता कर रहा है. इस कारण यूक्रेन अब ताकत के साथ रूस को उत्तर दे रहा है. हालांकि अमेरिका का शत्रु नंबर 1 चीन अब रूस के साथ खड़ा होता दिख रहा है. ऐसे में एशिया में रूस, खासकर चीन की अकड़ ढीली करने के लिए सुदूर पूर्व में जापान के साथ नाटो अब अपनी करीबी बढ़ा रहा है. यह बात निश्चित रूप से चीन को चुभेगी.
यूक्रेन के पक्ष में खड़ा नाटो अब एशिया में भी चीन की अकड़ ढीली करने के लिए अपना विस्तार कर रहा है. ऐसा करके वह एशिया में शक्ति संतुलन करना चाहता है. ताकि चीन की दादागिरी कम कर सके. ऐसे में जापान और नाटो राष्ट्र आपसी योगदान को और बढ़ाने जा रहे हैं. जापान और नाटो राष्ट्र एक नए डॉक्यूमेंट को अपनाने जा रहे हैं जिससे दोनों के बीच रिश्ते मजबूत होंगे. साथ ही रूस और चीन से निपटने के लिए एक मिलाजुला फ्रेमवर्क बनेगा. जापान और नाटो के बीच बढ़ती करीबी से रूस और चीन के बीच बढ़ती सेना घनिष्ठता को गहरा आघात लगेगा.
जापान के करीब से उड़े थे रूस और चीन के फाइटर जेट
रूस और चीन ने हाल ही में लड़ाकू विमान और बॉम्बर के साथ जापान के करीब से उड़ान भरी थी. ऐसा करने का मकसद जापान को डराना था. वहीं उत्तर कोरिया भी बैलेस्टिक मिसाइलों का परीक्षण करके अमेरिका के दोस्त दक्षिण कोरिया और जापान को डराना चाहता है. हाल ही में रूस और चीन की जापान को डराने की प्रयास पर जापान ने भी उत्तर में फाइटर जेट हवा में उड़ा दिए थे. जापान हालांकि अभी भी 31 राष्ट्रों के ‘नाटो’ समूह का मेंबर नहीं है, लेकिन एक ग्लोबल पार्टनर जरूर है.
जापान और नाटो में 9 वर्ष पहले हुआ था ये एग्रीमेंट
जापान और नाटो के बीच 2014 में एक एग्रीमेंट हुआ था. इसमें समुद्री सुरक्षा और मानवीय सहायता शामिल है, लेकिन सेना योगदान इस एग्रीमेंट में शामिल था. लेकिन अब ऐसी योजना बन रही है कि इस योगदान को भी बढ़ाया जाए. इस वर्ष जुलाई में लिथुआनिया में नाटो राष्ट्रों की मीटिंग होगी. इसमें यह फैसला लिया जा सकता है. जापान के पीएम फुमियो किशिदा को बुलाया जाएगा.
जापान को चीन से डर, इसलिए खरीद रहा हथियार
जापान को डर है कि ताइवान के साथ-साथ चीन उसे भी कहीं निशाना न बना दे. क्योंकि चीन के साथ कुछ द्वीपों को लेकर जापान का टकराव है. यही कारण है कि जापान अमेरिका से घातक मिसाइलें और लड़ाकू विमान खरीद रहा है. हिरोशिमा में हाल ही में आयोजित जी-7 राष्ट्रों की मीटिंग में जापान ने चीनी सैन्य तैयारी पर गहरी चिंता जताई थी.