वाशिंगटन, 16 मई (आईएएनएस). अमेरिकी विदेश विभाग की एक नयी रिपोर्ट में चीन द्वारा तिब्बत में बौद्ध धर्म के मानने वालों के उत्पीड़न और धर्म के दो प्रमुख नेताओं को नजरबंद करने की बात कही गई है.
अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर विदेश विभाग की 2022 की रिपोर्ट, सोमवार को जारी की गई. इसमें पिछले वर्ष चीन के कब्जे वाले तिब्बत में भिक्षुओं, ननों और अन्य व्यक्तियों को बिना मुकदमे के जबरन गायब करने, अरैस्ट करने, शारीरिक उत्पीड़न और लंबे समय तक हिरासत में रखने के आरोप लगाए गए हैं.
यह रिपोर्ट चीन द्वारा पंचेन लामा के किडनैपिंग की 28वीं बरसी से कुछ ही दिन पहले आई है, जो एक उच्च श्रेणी के तिब्बती बौद्ध आदमी हैं, जिन्हें छह वर्ष की उम्र में उनके जबरन लापता होने के बाद से सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है.
रिपोर्ट में नोबेल शांति पुरस्कार विजेता तिब्बती बौद्ध नेता दलाई लामा के दूतों के साथ वार्ता करने से चीन के इनकार का भी उल्लेख किया गया है.
राज्य के सचिव एंटनी जे। ब्लिंकन और अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता के राजदूत रशद हुसैन ने तिब्बत के राष्ट्रपति तेन्चो ग्यात्सो के अंतरराष्ट्रीय अभियान में भाग लेने वाले विदेश विभाग के एक कार्यक्रम में रिपोर्ट जारी की.
ग्यात्सो ने कहा, अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर 2022 की रिपोर्ट के विमोचन के अवसर पर मैं अन्य नागरिक समाज के नेताओं और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिवक्ताओं के साथ शामिल होने तिब्बत में धार्मिक उपासकों के चीन के उत्पीड़न पर प्रकाश डालने के लिए विदेश विभाग का आभारी हूं.
रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि तिब्बतियों को अपने विश्वास का स्वतंत्र रूप से अभ्यास करने, अपने धार्मिक अधिकारों के लिए बोलने या दलाई लामा और पंचेन लामा जैसे अपने आध्यात्मिक नेताओं की पूजा-वंदना करने पर उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है. इस उत्पीड़न को लाने का सबसे अच्छा उपाय है.
रिपोर्ट के अनुसार बौद्ध मठों को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं के चित्रों प्रदर्शित करने और अपने घरों में दलाई लामा और अन्य लामाओं के चित्रों को हटाने के लिए विवश किया जा रहा है.
दलाई लामा का चित्र रखने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, उनकी तस्वीर रखने पर सख्त नतीजा भुगतना पड़ता है.
समाचार लेखों और अधिकार समूहों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में बोला गया है कि चीनी पुलिस ने जुमकार नामक एक तिब्बती को उसके घर की वेदी पर दलाई लामा की तस्वीर मिलने के बाद अरैस्ट कर लिया. फोटो छुपाने के लिए जुमकार को योगदान करने पर उसकी बहन यूडॉन को भी अरैस्ट कर लिया.
रिपोर्ट के अनुसार, ऑफिसरों को लोगों को ग्यालत्सेन नोरबू के प्रति निष्ठा प्रदर्शित करने के लिए विवश करने का निर्देश दिया गया है, जिन्हें चीनी नेताओं ने 17 मई, 1995 को पंचेन लामा नियुक्त किया था.
रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने पिछले वर्ष तिब्बती बौद्ध धर्म के सामान्य अभ्यासियों पर भी कार्रवाई की थी.
इसमें बोला गया है कि चीन ने बौद्ध मठों और अन्य संस्थानों के आकार पर प्रतिबंध लगाना और मठों से भिक्षुओं और ननों को निकालने के लिए 2016 में प्रारम्भ किए गए अभियान को जारी रखा है.
रिपोर्ट में बोला गया है कि लारुंग गार और याचेन गार बौद्ध संस्थानों से तीन वर्ष में 6 से 17 हजार भिक्षुओं और ननों को निकाला गया था.
जिन लोगों को निष्कासित किया गया, उन्हें अपनी धार्मिक शिक्षा कहीं और जारी रखने से मना किया गया.