बीजिंग: चीन के जुल्मों से परेशान तिब्बत के लोग दुनिया के कोने-कोने में अपनी आवाज उठा रहे हैं. इसी कड़ी में यूरोप में रहने वाले तिब्बतियों ने भी इटली के मिलानो में अपनी तीसरी मीटिंग की है. इस बैठक में चीन द्वारा तिब्बत में लागू किए जा रहे शिक्षा तंत्र, जीरो कोविड पॉलिसी जैसे मामले उठाए गए. यूरोप में बसे तिब्बतियों ने यह मीटिंग 1-2 अक्टूबर को बुलाई थी.
रिपोर्ट्स के अनुसार, यूरोपीय राष्ट्रों से आए समुदाय के अनेक प्रतिनिधि (अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव) इस बात से चिंतिंत हैं कि चीन की शी जिनपिंग गवर्नमेंट तिब्बत में बोर्डिंग विद्यालय का सिस्टम लागू कर रही है, जिसमें 4 साल से कम उम्र वाले बच्चे जबरदस्ती भर्ती किए जा रहे हैं. विद्यालय में उन्हें चीनी भाषा सिखाई जा रही है और राष्ट्रवादी शिक्षा के नाम पर तिब्बती भाषा, संस्कृति और सभ्यता को मिटाने की कोशिशें की जा रही है. बैठक में उन वीडियोज पर भी वार्ता की गई, जो हाल अभी में चीन से आए थे. इन वीडियोज में साफ नज़र आ रहा है कि कैसे जीरो-कोविड पॉलिसी के नाम पर तिब्बतियों को क्वारंटाइन सेंटरों में बगैर टेस्ट के कैद कर दिया गया और उन्हें सड़ा हुआ भोजन दिया गया.