China Taiwan: अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष नैंसी पेलोसी के अगस्त के मध्य में ताइवान की यात्रा करने के बाद पहली बार अमेरिकी नौसना के दो युद्धपोत रविवार को ताइवान जलडमरूमध्य से गुजरे. अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों के ताइवान जलडमरूमध्य से होकर गुजरने की यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब ताइवान को लेकर चीन और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है. इस जलडमरूमध्य को लेकर पहले से व्याप्त तनाव के बीच अमेरिकी नौसेना के सातवें बेड़े ‘यूएस सेवंथ फ्लीट’ ने बताया कि ‘यूएसएस एंटीटम’ और ‘यूएसएस चांसलर्सविले’ अपनी नियमित यात्रा के दौरान ताइवान जलडमरूमध्य से होकर गुजरे.
‘यूएस सेवंथ फ्लीट’ ने बोला कि पोत ‘किसी भी तटीय राष्ट्र के समुद्री जल क्षेत्र से परे जलडमरूमध्य में एक गलियारे से गुजरे हैं.’ उल्लेखनीय है कि पेलोसी की हाल की ताइवान यात्रा से खफा चीन ने ताइवान जलडमरूमध्य और ताइवान के जलक्षेत्र में कई युद्धपोत और इसके हवाई क्षेत्र के पास कई चीनी लड़ाकू विमान भेजे हैं. चीन ने लंबी दूरी की मिसाइल भी दागी हैं. चीन ने ताइवान को दंडित करने की मांग करते हुए जलडमरूमध्य में कई सेना अभ्यास भी किए हैं. दरअसल, चीन ताइवान पर अपना दावा जताता है और यहां किसी भी अन्य राष्ट्र की गवर्नमेंट से जुड़े लोगों की यात्रा का विरोध करता है.
क्या है चीन और ताइवान का इतिहास
ताइवान दक्षिण-पूर्वी चीन के तट से लगभग 160 किमी दूर एक द्वीप है, जो फूजौ, क्वानझोउ और जियामेन के चीनी शहरों के सामने है. यहां शाही किंग राजवंश का शासन चलता था, लेकिन इसका नियंत्रण 1895 में जापानियों के पास चला गया. द्वितीय विश्व युद्ध में जापान की हार के बाद, ये द्वीप वापस चीनी हाथों में चला गया. माओत्से तुंग के नेतृत्व में कम्युनिस्टों द्वारा मुख्य भूमि चीन में गृह युद्ध जीतने के बाद, राष्ट्रवादी कुओमिन्तांग पार्टी के नेता च्यांग काई-शेक 1949 में ताइवान भाग गए. च्यांग काई-शेक ने द्वीप पर चीनी गणराज्य की गवर्नमेंट की स्थापना की और 1975 तक राष्ट्रपति बने रहे.
चीन ने कभी भी ताइवान के अस्तित्व को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता नहीं दी है. उसका तर्क है कि यह हमेशा एक चीनी प्रांत था. ताइवान का बोलना है कि आधुनिक चीनी राज्य 1911 की क्रांति के बाद ही बना था, और यह उस राज्य या चीन के जनवादी गणराज्य का हिस्सा नहीं है, जो कम्युनिस्ट क्रांति के बाद स्थापित हुआ था. दोनों राष्ट्रों के बीच सियासी तनाव जारी है. आपको बता दें चीन और ताइवान के आर्थिक संबंध भी रहे हैं. ताइवान के कई प्रवासी चीन में काम करते हैं और चीन ने ताइवान में निवेश किया है.
अमेरिका और दुनिया ताइवान को कैसे देखते हैं?
संयुक्त देश ताइवान को एक अलग राष्ट्र के रूप में मान्यता नहीं देता है. पूरे विश्व में सिर्फ 13 देश- मुख्य रूप से दक्षिण अमेरिकी, कैरिबियन, द्वीपीय और वेटिकन इसे मान्यता देते हैं. वहीं अमेरिका की चीन से बढ़ती दुश्मनी के चलते उसकी नीति साफ नहीं लग रही है. जून में राष्ट्रपति जो बाइडेन ने बोला था कि यदि चीन ताइवान पर अतिक्रमण करेगा, तो अमेरिका उसकी रक्षा करेगा. लेकिन इसके ठीक बाद में बाइडेन के बयान पर सफाई देते हुए अमेरिका ने बोला कि वह ताइवान की स्वतंत्रता का समर्थन नहीं करता है. अमेरिका का ताइपे के साथ कोई औपचारिक संबंध नहीं है, फिर भी वह उसे अंतर्राष्ट्रीय समर्थन देता है और हथियारों की आपूर्ति करता है.
साल 1997 में रिपब्लिकन पार्टी के तत्कालीन हाउस स्पीकर न्यूट गिंगरिच ने ताइवान का दौरा किया था. तब भी चीन ने ऐसी ही प्रतिक्रिया दी थी, जैसी वो अभी दे रहा है. चीन के नेताओं के साथ अपनी बैठकों का जिक्र करते हुए गिंगरिच ने बोला था, “हम चाहते हैं कि आप समझें, हम ताइवान की रक्षा करेंगे.” लेकिन उसके बाद स्थिति बदल गई. चीन आज विश्व राजनीति में बहुत मजबूत शक्ति बन गया है. चीनी गवर्नमेंट ने 2005 में एक कानून पारित किया था, जिसमें बोला गया कि यदि ताइवान अलग होने की बात करता है, तो उसे सेना कार्रवाई से मुख्य भूमि में शामिल किया जा सकता है.
ताइवान की गवर्नमेंट ने हाल के सालों में बोला है कि सिर्फ द्वीप के 23 मिलियन लोगों को अपना भविष्य तय करने का अधिकार है और हमला होने पर वह अपनी रक्षा करेगा. 2016 से, ताइवान ने एक ऐसी पार्टी को चुना है, जो ताइवान की स्वतंत्रता की वकालत करती है.