- पूर्वी हिस्से में रूस ने प्रभुत्व बढ़ाने के प्रयासों को रखा जारी
- यूक्रेन के दक्षिणी शहर में औद्योगिक केंद्रों पर किया हमला
- ‘पिछले कुछ हफ्ते से लगातार रूसी मिसाइलों से हमले हो रहे’
Russia-Ukraine War: रूस-यूक्रेन के बीच जारी जंग का आज 143वां दिन है. रूसी मिसाइलों ने आज रविवार को यूक्रेन के रणनीतिक महत्व वाले एक दक्षिणी शहर में औद्योगिक केंद्रों पर हमला किया. साथ ही राष्ट्र के पूर्वी हिस्से में अपना प्रभुत्व बढ़ाने के प्रयासों को जारी रखा.
यूक्रेन के संपूर्ण ब्लैक सी तटीय क्षेत्र को संपर्क से काटने की घोषणा
रूसी सेना ने रोमानियाई सीमा तक यूक्रेन के संपूर्ण ब्लैक सी तटीय क्षेत्र को संपर्क से काटने की घोषणा की है. यदि उसे कामयाबी मिली, तो इससे यूक्रेन की अर्थव्यवस्था एवं व्यापार पर बड़ा आघात होगा. वहीं, रूस मालडोवा के अलगाववादी क्षेत्र ट्रांसनिस्त्रिया में एक पुल बना सकेगा. इससे पहले यूक्रेनी बलों ने माइकोलैव पर कब्जे के रूस के प्रयासों को असफल किया था.
रूस ने यूक्रेन के उत्तर, पूर्वी और दक्षिणी क्षेत्र को निशाना बनाया
रूस ने यूक्रेन में शनिवार को कई स्थानों पर गोलाबारी की और मिसाइल से हमला किया, जिसमें कम से कम 16 लोग मारे गए. इससे पहले रूस की सेना ने यूक्रेन पर हमला तेज करने की घोषणा की थी. रूस के रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को बोला कि रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु ने सभी क्षेत्रों में सेना कार्रवाई तेज करने का निर्देश दिया है, ताकि कीव को डोनबास और अन्य क्षेत्रों में रिहायशी इलाकों पर रॉकेट और तोपों से हमला करने से रोका जा सके.
रूस ने अपने ताजा हमले में यूक्रेन के उत्तर, पूर्वी और दक्षिणी क्षेत्र को निशाना बनाया. यूक्रेन के दूसरे सबसे बड़े शहर खारकीव पर हाल के दिनों में भारी बमबारी की गई है और यूक्रेन के ऑफिसरों और क्षेत्रीय कमांडरों को डर है कि आने वाले दिनों में यह हमले बढ़ सकते हैं.
जी-20 के वित्त मंत्रियों के बीच यूक्रेन युद्ध को लेकर मतभेद
वहीं, इंडोनेशिया के बाली में दुनिया की सबसे बड़ी 20 अर्थव्यवस्थाओं के वित्तीय नेताओं ने इस हफ्ते बैठकों में मुद्रास्फीति और खाद्य संकट जैसी अंतरराष्ट्रीय रोंगों से संयुक्त रूप से निपटने की जरूरत पर सहमति जताई, लेकिन यूक्रेन में युद्ध पर मतभेदों को पाटने में विफल रहे. इस साल जी-20 राष्ट्रों की बैठक की मेजबानी कर रहे इंडोनेशिया ने यूक्रेन में रूस के आक्रमण पर सदस्य राष्ट्रों के बीच विभाजन को पाटने की प्रयास की, लेकिन संघर्ष को लेकर शत्रुता साफ थी. हालांकि, वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के प्रमुखों ने उन अन्य अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों पर सहमति व्यक्त की, जो युद्ध के कारण और खराब हुई हैं. इन चुनौतियों में दशकों की उच्च मुद्रास्फीति और खाद्य असुरक्षा शामिल है, जो युद्ध से और गंभीर हो गई है.