Chandrayaan 3 Update: कुछ महीने पहले चंद्रयान-3 ने चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करके बड़ी कामयाबी हासिल की। पूरी दुनिया से इसरो और हिंदुस्तान को शुभकामना संदेश मिले। इसके बाद लोगों की नजर स्पेस में लॉन्च की जाने वाली सैटेलाइट्स पर काफी रहने लगी है। अब लोग अंतरिक्ष को जानने के लिए उत्सुक रहते हैं। इस बीच, स्पेस को लेकर अब जापान ने बड़ा निर्णय लिया है, जिसके बारे में जानकर सभी दंग रह जाएंगे। यदि इसमें कामयाबी मिल गई तो फिर यह ऐतिहासिक ही होगा। दरअसल, जापान अब स्पेस में लकड़ी की बनी हुई सैटेलाइट्स को भेजने पर काम कर रहा है। अभी तक आपने स्टील, एलुमिनियन के रॉकेट्स ही देखे होंगे, लेकिन भविष्य में इनकी स्थान लकड़ी की सैटेलाइट्स ले सकती हैं।
‘सीएनएन’ के अनुसार, जापान में क्योटो यूनिवर्सिटी के एक शोधकर्ता, मुराता यह पता लगा रहे हैं कि अंतरिक्ष में जैविक सामग्रियों का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है। मुराता को आश्चर्य हुआ कि क्या वह चंद्रमा या मंगल ग्रह पर एक लकड़ी का घर बना सकते हैं। उन्होंने लकड़ी की एक सैटेलाइट बनाकर सिद्धांत का परीक्षण करने का निर्णय किया। नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (एनओएए) के हालिया अध्ययन में पाया गया कि समताप मंडल में 10% वायुमंडलीय एयरोसोल में उपग्रहों सहित अंतरिक्ष यान से धातु के कण शामिल थे। इन धातु के टुकड़ों का दीर्घकालिक असर अज्ञात है, लेकिन वैज्ञानिकों को चिंता है कि यह पृथ्वी की नाजुक ओजोन परत को हानि पहुंचा सकता है।
मुराता का बोलना है कि लकड़ी के उपग्रह अपने धातु समकक्षों के समान कार्यक्षमता प्रदान करते हुए भी ग्रह के लिए बेहतर होंगे। मुराता ने कहा, ”अपने जीवन के अंत में, उपग्रह वायुमंडल में पुनः प्रवेश करते हैं। अंतर यह है कि लिंगोसैट में लकड़ी जल जाएगी और अंततः गैस बन जाएगी, जबकि धातुएं महीन कण बन जाती हैं। स्पेस में लकड़ी से बनी सैटेलाइट भेजना केवल सपना नहीं है, बल्कि मुराता और उनकी टीम इस प्रोजेक्ट पर पिछले चार वर्ष से काम भी कर रही है। टीम ने अंतरिक्ष के लिए सामग्री का लचीलापन का परीक्षण करने के लिए 2021 में लकड़ी के नमूने अंतरिक्ष में भेजे थे। अब, वे लिंगोसैट नामक प्रोटोटाइप उपग्रह को अगले वर्ष की आरंभ में कक्षा में भेजने के लिए जापान की अंतरिक्ष एजेंसी (जेएक्सए) और नासा के साथ काम कर रहे हैं।