प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आत्मनिर्भर हिंदुस्तान का मंत्र कमाल कर रहा है. अब रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा भारत अपने साथ ही साथ मित्र राष्ट्रों की भी सुरक्षा जरूरतों को पूरी कर रहा है. आपको जानकर आश्चर्य होगी कि हिंदुस्तान का रक्षा उत्पादन अब प्रतिवर्ष 1 लाख करोड़ रुपये का आंकड़े को पार कर गया है. साथ ही 16 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात भी करने लगा है. इससे आत्मनिर्भर होते हिंदुस्तान की ताकत का अंदाजा सरलता से लगाया जा सकता है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को बोला कि पूर्ण आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में विचारधारा के इतर सभी पक्षों में हमेशा सहमति रही है और राष्ट्र का रक्षा उद्योग मित्र राष्ट्रों की सुरक्षा जरूरतों को भी पूरा कर रहा है.
एक सरकारी बयान में बोला गया है कि रक्षा मंत्री ने यहां ‘रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता’ विषय पर रक्षा मंत्रालय की सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता की. बैठक के दौरान, समिति में शामिल सांसदों को आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए रक्षा मंत्रालय द्वारा उठाए गए कदमों और फैसलों के कारण अब तक हुई प्रगति से अवगत कराया गया. रक्षामंत्री ने राष्ट्र की सुरक्षा बढ़ाने और विश्व स्तर पर उत्पन्न हो रहे विभिन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए सशस्त्र बलों को तकनीकी रूप से उन्नत बनाने की खातिर गवर्नमेंट के लगातार प्रयासों पर प्रकाश डाला. आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए ‘‘मांग आश्वासन’’ को सबसे जरूरी पहलुओं में से एक बताते हुए सिंह ने बोला कि उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए कई फैसला लिए गए हैं.
2023-24 में रक्षा पूंजी खरीद बजट का 75 फीसद होगा
रक्षामंत्री ने देशी रक्षा उद्योगों को और अधिक मजबूत करने का संकल्प दोहराया है. उन्होंने बोला कि इनमें पूंजी परिव्यय सहित रक्षा बजट में लगातार वृद्धि, वित्त साल 2023-24 में घरेलू उद्योग के लिए रक्षा पूंजी खरीद बजट का रिकॉर्ड 75 फीसदी निर्धारित करना और सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची जारी करना शामिल हैं. मंत्री ने जोर दिया कि गवर्नमेंट के निर्णय रंग लाने लगे हैं और आज राष्ट्र पनडुब्बी, लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर और हथियारों का अपने राष्ट्र में विनिर्माण कर रहा है. उन्होंने बोला कि रक्षा उद्योग के बढ़ने से न सिर्फ घरेलू आवश्यकतायें पूरी हो रही हैं, बल्कि यह मित्र राष्ट्रों की जरूरतों को भी पूरा कर रहा है । सिंह के हवाले से बयान में बोला गया है, ‘‘पिछले वित्तीय साल में हमारा रक्षा उत्पादन एक लाख करोड़ रुपये को पार कर गया और निर्यात 16 हजार करोड़ तक पहुंच गया है.
देश का रक्षा उद्योग ठीक रास्ते पर
उक्त आंकड़े इस बात का साक्ष्य हैं कि रक्षा सेक्टर और राष्ट्र ठीक रास्ते पर है.’’ रक्षा मंत्री ने इस तथ्य की सराहना की कि विचारधारा के इतर, आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में सभी पक्षों के साथ हमेशा सहमति रही है. उन्होंने कहा, ‘‘अगर हम हिंदुस्तान को रक्षा आयातक की स्थान रक्षा निर्यातक बनाना चाहते हैं तो हम लोगों को हर हालात में ‘देश सबसे पहले’ के विचार के साथ एकजुट होकर खड़े रहना चाहिये. तभी हम आत्मनिर्भर हिंदुस्तान के लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल हो सकते हैं .