- 50 से अधिक कंपनियों को ऑयल एवं गैस क्षेत्र में निवेश का आमंत्रण
- भारत है दुनिया का चौथा बड़ा ऑयल आयातक देश
- वैश्विक ऊर्जा कंपनियों का नया स्थल बनने वाला है भारत
इन दिनों हिंदुस्तान अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत छवि के साथ उभरा है. दुनिया में पश्चिम से लेकर पूर्व तक और यूरोप से लेकर एशिया तक, अफ्रीका महाद्वीप से लेकर आस्ट्रेलिया महाद्वीप तक के सभी राष्ट्रों के साथ उसके अच्छे संबंध हैं. हिंदुस्तान अपनी स्वतंत्र विदेश नीति, मजबूत नेतृत्व और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के दम पर दुनिया में लगातार दबदबा बढ़ा रहा है. हिंदुस्तान की निष्ठावान और लोकतांत्रिक प्रणाली दुनिया के राष्ट्रों के अपनी ओर आकर्षित कर रही है. इसी कड़ी में अब हिंदुस्तान ने अमेरिका को भी ऑयल और गैस के क्षेत्र में निवेश का आमंत्रण दिया है.
भारत दुनिया का चौथा बड़ा ऑयल आयातक
जैन ने व्यवसायी सुगमता के बारे में बात करते हुए उद्योग के समक्ष आने वाले किसी भी मामले के निवारण के लिए नीतिगत कदम उठाने का आश्वासन दिया. उन्होंने विदेशी एवं निजी निवेश के जरिये घरेलू स्तर पर ऑयल और गैस उत्पादन को बढ़ाने का निवेदन किया. उन्होंने कहा, ‘‘भारत दुनिया में चौथा सबसे बड़ा ऑयल आयातक है और हिंदुस्तान में प्रति आदमी ऊर्जा खपत बढ़ने से मांग बढ़ना लाजिमी है.
वैश्विक ऊर्जा कंपनियों का नया स्थल बनने वाला है भारत
भारत अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कंपनियों का नया स्थल बनना चाहता है. पूरे विश्व के ऑयल उत्पादक हिंदुस्तान में पैरा जमाने को उत्सुक हैं क्योंकि राष्ट्र की अर्थव्यवस्था में वृद्धि के साथ मांग भी बढ़ने वाली है.’’ जैन ने बोला कि हिंदुस्तान गवर्नमेंट की नीति पारदर्शी एवं उदार है और उसके कई कदमों की वजह से ही 2021-22 में हिंदुस्तान में 83.57 अरब $ का सर्वाधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आया है. ऐसे में भविष्य में इसमें और बढ़ोत्तरी की आशा की जा सकती है. हिंदुस्तान में निवेश सुरक्षित और लाभकारी है.
रूस से भी ऑयल और गैस लेता है भारत
भारत अभी रूस से भी ऑयल और गैस को आयात करता है. अब अमेरिका को भी हिंदुस्तान में निवेश का आमंत्रण दिया है. ऐसे में हिंदुस्तान को दोनों तरह से लाभ होने वाला है. यदि अमेरिका निवेश करता है तो इससे हिंदुस्तान में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे. साथ ही ऑयल और गैस के मूल्य भी कंपटीशन में सस्ते होंगे. वहीं इससे पहले रूस हिंदुस्तान को सस्ते ऑयल और गैस का ऑफर दे सकता है. ताकि हिंदुस्तान में अमेरिका इस क्षेत्र में निवेश न करे