नई दिल्लीः जी 20 की अध्यक्षता कर रहे हिंदुस्तान से दुनिया को काफी सारी उम्मीदें हैं. विश्व की निगाहें जी 20 से यूक्रेन युद्ध से लेकर दुनिया में फैले खाद्य और ऊर्जा संकट के निवारण पर भी टिक गई हैं. इस सम्मेलन में शिरकत कर रहे फ्रांस, अमेरिका, रूस और चीन जैसे राष्ट्रों को आशा है कि हिंदुस्तान की अध्यक्षता में जी 20 से कोई न कोई रास्ता यूक्रेन युद्ध पर जरूर निकाला जाएगा. इस पर एक संयुक्त बयान जारी करने को लेकर भी आपस में समांजस्य बैठाया जा रहा है. अध्यक्ष होने के नाते हिंदुस्तान की जिम्मेदारी इस मद में जितनी ही जरूरी है, उससे अधिक चुनौतीपूर्ण भी. पूरी दुनिया जी 20 का मार्गदर्शन करने के लिए हिंदुस्तान से मांग कर रही है.
फ्रांस ने बृहस्पतिवार को जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक में संयुक्त बयान पर आम सहमति बनाने के लिए हिंदुस्तान का समर्थन किया. यूक्रेन संघर्ष को लेकर अमेरिका के नेतृत्व में पश्चिमी राष्ट्रों और रूस-चीन गठजोड़ के बीच तीखे मतभेद हैं. बैठक में अपनी टिप्पणी में फ्रांस की विदेश मंत्री कैथरीन कोलोना ने यह भी बोला कि हिंदुस्तान की जी-20 अध्यक्षता के दौरान ‘‘एक पृथ्वी, एक कुटुंब, एक भविष्य’’ के दृष्टिकोण को, दुनिया के सामने कई चुनौतियों का सामना करने के लिए समूह का मार्गदर्शन करना चाहिए. अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन, रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव, चीन के किन गांग, ब्रिटेन के जेम्स क्लेवरली और विदेश मामलों के लिए यूरोपीय संघ के प्रतिनिधि जोसेप बोरेल फोंटेल्स, विदेश मंत्री एस जयशंकर की अध्यक्षता वाली बैठक में भाग लेने वालों में शामिल हैं.
दुनिया कर रही हिंदुस्तान से अंतरराष्ट्रीय संकटों पर दृढ़ता दिखाने की मांग
भारतीय पक्ष एक संयुक्त बयान पर सहमति के लिए मुश्किल कोशिश कर रहा है, क्योंकि ऐसा न होने की स्थिति में इसका गलत संदेश जा सकता है. फ्रांस की विदेश मंत्री ने बोला कि जी-20 को मौजूदा स्थिति का दृढ़ता से उत्तर देना चाहिए, जैसा कि उसने नवंबर में बाली शिखर सम्मेलन में किया था. हिंदुस्तान ने यूक्रेन संघर्ष को लेकर पश्चिमी राष्ट्रों और रूस के बीच गहरे मतभेदों के बावजूद बाली घोषणापत्र को आखिरी रूप देने में जरूरी किरदार निभाई थी. कोलोना ने कहा, ‘‘हम जी-20 के लिए एक जरूरी क्षण में हैं. भारतीय अध्यक्षता की किरदार नितांत आवश्यक है. एक पृथ्वी, एक कुटुंब, एक भविष्य के दृष्टिकोण से हमें अपनी कई चुनौतियों का सामना करने के लिए मार्गदर्शन करना चाहिए. कोलोन ने कहा, ‘‘यूक्रेन के विरूद्ध और कानून के शासन के विरूद्ध रूसी हमले को एक वर्ष हो चुका है. रूस की ओर से थोपे गये युद्ध से भोजन, ऊर्जा, महंगाई के मुद्दे में लगभग हर राष्ट्र के लिए नकारात्मक रिज़ल्ट सामने आया है.
भारत से बाली जैसा संदेश देने की जाने की मांग
फ्रांस ने कहा, ‘‘जी20 को दृढ़ता से उत्तर देना चाहिए, जैसा कि उसने बाली शिखर सम्मेलन में किया था. बाली का संदेश साफ था: जी20 के रूप में, हमें रूस के युद्ध से भुगतने के लिए छोड़ देने के बजाय सबसे कमजोर लोगों की रक्षा करने वाले निवारण की आवश्यकता है.’’ फ्रांस की विदेश मंत्री ने बोला कि बैठक का सामूहिक मिशन ‘‘परिणाम’’ देना है. उन्होंने कहा, ‘‘इस विषय पर और जलवायु बदलाव विकास वित्त जैसी अन्य सभी चुनौतियों पर खंडित रुख और सुनियोजित विरोध के बजाय ‘साझा जिम्मेदारी’ की भावना की जरूरत है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम में से प्रत्येक को सहयोग देना चाहिए. हमें उत्तर बनाम दक्षिण खेमे जैसे झूठे विचारों से दूर रहना चाहिए, इसके बजाय एक महत्वाकांक्षी, सुधारित, कुशल बहुपक्षवाद का निर्माण करना चाहिए.’’ जर्मन विदेश मंत्री एनालेना बेयरबॉक, ब्रिटिश विदेश मंत्री जेम्स क्लेवरली और विदेशी मामलों के लिए यूरोपीय संघ के प्रतिनिधि बोरेल ने यूक्रेन पर आक्रमण के लिए रूस की आलोचना की, जबकि चीन के किन गांग ने संघर्ष को हल करने के लिए 12-सूत्री चीनी शांति योजना का उल्लेख किया.