- ईरान परमाणु समझौते को लेकर हुआ गंभीर
- अमेरिका से दोबारा न भागने की गारंटी मांगी
- अमेरिका पर भरोसा करने से किया इनकार
ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी ने बुधवार को बोला कि उनका राष्ट्र परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाने वाले समझौते को बहाल करने को लेकर ‘गंभीर’ है. लेकिन इसके साथ ही उन्होंने प्रश्न किया कि क्या किसी समझौते पर पहुंचने के लिए अमेरिका की प्रतिबद्धता पर भरोसा किया जा सकता है? अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ओबामा प्रशासन की मध्यस्थता से हुए समझौते से 2018 में अमेरिका को अलग कर लिया था. इसके बाद ईरान ने समझौते के अनुसार परमाणु संवर्धन पर लगाई गई सीमा का पालन करना छोड़ दिया.
क्या कहता है परमाणु समझौता?
साल 2015 का यह समझौता ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाता था और इसके बदले में ईरान को उस पर लगाए गए प्रतिबंधों से राहत दी गई थी. रायसी ने यह भी बोला कि ईरान की परमाणु गतिविधियों की एक तरफा जांच की जाती है जबकि अन्य देशों के परमाणु कार्यक्रम सीक्रेट रहते हैं. वह इजरायल के संदर्भ में यह बात कह रहे थे. उन्होंने महासभा में उपस्थित विश्व नेताओं से यह भी बोला कि ईरान सभी पड़ोसियों से अच्छे संबंध चाहता है. उनका इशारा सऊदी अरब और अन्य अरब राष्ट्रों की ओर था, जिनके साथ ईरान के संबंध अच्छे नहीं हैं.
सऊदी अरब और ईरान ने की वार्ता
हालांकि अमेरिका में जो बाइडेन के राष्ट्रपति पद संभालने के बाद सऊदी अरब और ईरान ने कई बार सीधे वार्ता की है लेकिन दोनों राष्ट्रों के बीच तनाव अब भी बना हुआ है. इस बीच संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने हाल में तेहरान स्थित अपना दूतावास फिर से खोल लिया और वहां अपना राजदूत भी भेज दिया है. रायसी ने ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों की भी निंदा की है. उनका बोलना है कि ये ईरान के लोगों को दंडित करना है.
ईरान की मांग को लेकर विवाद
अमेरिका ने बोला है कि ईरान 2015 के परमाणु समझौते से परे जाकर ‘अस्वीकार्य मांग’ कर रहा है. ईरान ने 2015 में अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, रूस और चीन के साथ परमाणु समझौता किया था. अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2018 में समझौते से अमेरिका के हटने की घोषणा की थी. उन्होंने बोला था, ‘ईरान समझौते का दिल एक कोरी कल्पना है, जो कहता है कि ये कातिल शासन सिर्फ शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम चाहता है. निश्चित प्रमाण हैं कि ईरान का ये वादा झूठा है.’
इसके बाद से ईरान ने एक बार फिर अपने परमाणु कार्यक्रम का विस्तार करना प्रारम्भ कर दिया था. इससे पहले इस मुद्दे में अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने बोला था कि अमेरिका बेपटरी हुए परमाणु समझौते के लिए ईरान की ‘हमेशा प्रतीक्षा नहीं करेगा