चीन ने नए संसद भवन के उद्घाटन का स्वागत किया है. सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने नए संसद भवन को महान प्रतीक के रूप में प्रतिष्ठित किया है.
इस महीने हिरोशिमा में क्वाड शिखर सम्मेलन के बाद पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा से पहले ड्रैगन ने अपने रंग बदलने प्रारम्भ कर दिए हैं. लगातार सीमा पर अपनी हरकतों से बाज नहीं आने वाले चीन ने हिंदुस्तान के नए संसद भवन की शान में कसीदे पढ़े हैं. चीन ने नए संसद भवन के उद्घाटन का स्वागत किया है. सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने नए संसद भवन को महान प्रतीक के रूप में प्रतिष्ठित किया है. ग्लोबल टाइम्स ने बोला है कि हिंदुस्तान गवर्नमेंट द्वारा निर्मित नए संसद भवन का उद्देश्य भारतीय राजधानी को औपनिवेशिक युग के निशान से मुक्त करना है.
उपनिवेशवाद के प्रतीकों को हटाने के लिए कई कदम उठाए
ग्लोबल टाइम्स ने लिखा कि हिंदुस्तान ने उपनिवेशवाद के प्रतीकों को हटाने के लिए कई बड़े कदम भी उठाए हैं, जिनमें औपनिवेशिक इतिहास से जुड़ी बजट प्रथाओं को बदलने और अंग्रेजी के आधिकारिक इस्तेमाल को कम करने और हिंदी भाषा के इस्तेमाल को बढ़ाने जैसे कई तरीका शामिल है. सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा उपनिवेशवाद के अवशेषों को लोगों के दिलों से हटाना, जो निस्संदेह नाम बदलने या लेबल हटाने से अधिक मुश्किल है.
भारत अपने विकास के लक्ष्यों को हासिल करने में सफल हो
भारत लगभग 200 सालों तक ब्रिटेन द्वारा उपनिवेश रहा था, और हिंदुस्तान में औपनिवेशिक असर के निशान व्यापक और गहन दोनों हैं. यह कल्पना की जा सकती है कि औपनिवेशीकरण का कार्य कितना विशाल है. 1968 में हिंदुस्तान गवर्नमेंट ने नयी दिल्ली में एक प्रमुख स्थल, इण्डिया गेट के सामने स्थित किंग जॉर्ज पंचम की मूर्ति को हटा दिया. फिर, 8 सितंबर, 2022 को मोदी गवर्नमेंट ने महारानी एलिजाबेथ द्वितीय की मौत के दिन इण्डिया गेट के सामने राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ कर दिया. औपनिवेशीकरण की प्रक्रिया आधी सदी से चली आ रही है, एक लंबी प्रक्रिया धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है. चीन कामना करता है कि हिंदुस्तान अपने विकास के लक्ष्यों को हासिल करने में सफल हो.
चीन और हिंदुस्तान के बीच टकराव पैदा करने में लगा अमेरिका
उस समय ब्रिटेन हिंदुस्तान पर फूट डालो और राज करो की रणनीति के माध्यम से लगभग 200 सालों के औपनिवेशिक शासन को लागू करने में सक्षम था. अब, पश्चिम, विशेष रूप से अमेरिका, बड़े पैमाने पर फूट डालो और राज करो का छिपु रूप में कोशिश कर रहा है. अखबार ने लिखा कि अमेरिका हाथी ड्रैगन दुश्मनी की मनगढ़ंत अवधारणा को आगे बढ़ाकर चीन और हिंदुस्तान के बीच टकराव पैदा करने में व्यस्त है. उसके पास अब इतनी शक्ति तो नहीं है कि वो हिंदुस्तान और चीन को अपने अधीन कर ले. इसलिए वो अपने लाभ के लिए दोनों राष्ट्रों के बीच दरार पैदा कर रहा है. ये औपनिवेशिक मानसिकता का ही एक रूप है.