China United Nations: पूरी दुनिया के नेता संयुक्त देश महासभा के वार्षिक सम्मेलन में शामिल होने के लिए न्यूयॉर्क एकत्र हो रहे हैं, वहीं महाशक्ति के तौर पर उभर रहे चीन का ध्यान जिनेवा में चल रही संयुक्त देश मानवाधिकार परिषद की बैठक पर केंद्रित है. चीन के राजनयिक लगातार मानवाधिकार परिषद की बैठक को लेकर अन्य राष्ट्रों से बात कर रहे हैं और और अपना पक्ष रख रहे हैं, ताकि शिंजियांग में उसके चरमपंथ विरोधी अभियान की आगे और जांच किए जाने की आसार को रोका जा सके.
इस जांच की आसार संयुक्त देश की रिपोर्ट के बाद बढ़ गई है, जिसमें चीन के पश्चिमी सीमावर्ती प्रांत में उइगर और अन्य मुसलमान समूहों के उत्पीड़न की बात सामने आई है. अटलांटिक महासागर के उल्टा छोरों पर हो रही इन बैठकों में चीन के संयुक्त देश को लेकर बंटे हुए रुख और उसके बढ़ते अंतरराष्ट्रीय असर की छाप दिखती है. बीजिंग संयुक्त देश में उन राष्ट्रों के समर्थन की आशा कर रहा है, जिनसे उसकी दोस्ती है और जिनमें से कई को उसने वित्तीय सहायता दी है जबकि अमेरिका नीति गुट जिसमें जी-7 शामिल हैं, लगातार चीन के प्रति मुखर हो रहे हैं.
बर्लिन स्थित मर्केटर इंस्टीट्यूट फॉर चाइना स्टडीज की हेलिना लेगार्डा कहती हैं, ‘चीन, संयुक्त देश को अहम मंच के तौर पर देखता है, जिसका उपयोग वह अपने रणनीतिक हितों और लक्ष्यों को आगे बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय क्रम में परिवर्तन के लिए कर सकता है.’ चीन स्थित रेनमिन यूनिवर्सिटी में अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के जानकार शी यिंगहांग कहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय क्रम को बनाए रखने में संयुक्त देश की किरदार का मतलब यह नहीं है कि चीन संयुक्त निकाय के हर नजरिए से सहमत हो. उन्होंने इस संदर्भ में Covid-19 महामारी के उद्गम की जांच और हाल में प्रकाशित शिंजियांग रिपोर्ट का हवाला दिया है.
मानवाधिकार कार्यालय को योगदान से इनकार
इससे पहले समाचार आई थी कि चीन ने संयुक्त देश मानवाधिकार कार्यालय द्वारा शिंजियांग प्रांत में उइगर और अन्य जातीय समूहों के विरूद्ध बीजिंग की नीतियों की आलोचना करने वाली एक रिपोर्ट जारी किए जाने के बाद बोला है कि वह मानवाधिकार कार्यालय के साथ योगदान नहीं कर सकता है. एक शीर्ष चीनी राजनयिक ने यह जानकारी दी थी. हालांकि जिनेवा में संयुक्त देश संस्थानों में चीन के राजदूत चेन जू ने बोला कि मानवाधिकार कार्यालय के साथ काम नहीं करने और विश्व संस्था के साथ योगदान करने के बीच अंतर है. चेन ने बोला कि पिछले सप्ताह जारी की गई रिपोर्ट में बोला गया है कि चीन की आतंकवाद विरोधी नीतियों के अनुसार कुछ अधिकारों का उल्लंघन इन्सानियत के विरूद्ध क्राइम हो सकता है, यह चीन और उसके कार्यों पर ‘बेबुनियाद आरोप’ है.
रिपोर्ट को खतरा पैदा करने वाला बताया
चेन ने यूएन जिनेवा प्रेस एसोसिएशन एसीएएनयू को बताया, ‘मानवाधिकार कार्यालय हमारे बारे में इस तरह की मूल्यांकन रिपोर्ट जारी कर रहा है, ऐसे में हम कार्यालय के साथ योगदान नहीं कर सकते हैं.’ उन्होंने बोला कि चीन का मानना है कि रिपोर्ट ‘खतरा पैदा करती है’ और वह ‘सहयोग नहीं कर सकता क्योंकि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ.’ 31 अगस्त को कार्यालय में अपने आखिरी दिन मानवाधिकारों के लिए संयुक्त देश की तत्कालीन उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट के कार्यालय ने एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें चीन पर उइगरों और अन्य जातीय समूहों के विरूद्ध मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का आरोप लगाया गया है.