रूस-यूक्रेन युद्ध के 22 महीने बीत जाने के बाद कीव का संघर्ष कमजोर पड़ने लगा है। इसकी वजह है उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) राष्ट्रों द्वारा लगातार कीव का समर्थन घट रहा है। ऐसे में यूक्रेन के पास जंग लड़ने के लिए हथियारों की भारी कमी हो गई है। यूक्रेन के राष्ट्रपति फिर भिन्न-भिन्न राष्ट्रों में घूम-घूमकर समर्थन जुटा रहे हैं। मगर अपेक्षित योगदान और जंग के लिए गोला-बारूद उन्हें नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में यूक्रेनी सैनिकों का हौसला टूटने लगा है और रूसी सेना लगातार हावी होती जा रही है। इस बीच जर्मनी पर यूक्रेन को जानबूझकर हथियार नहीं देने का इल्जाम भी लग रहा है। ताकि कीव रूस को बढ़त बनाने से रोकने में विफल हो जाए।
अपने ऊपर लग रहे इन आरोपों के उत्तर में जर्मन रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने बोला कि ‘कीव हमारा कोई सहयोगी नहीं है।’ हालांकि उन्होंने बोला कि इसके बावजूद जर्मनी यूक्रेन की पूरी सहायता कर रहा है। उसके ऊपर जानबूझकर हथियारों की आपूर्ति नहीं करने का इल्जाम गलत है। पिस्टोरियस ने बोला कि जर्मनी की तरह अन्य राष्ट्रों का समर्थन भी यूक्रेन के लिए घटा है। अकेले जर्मनी इसमें शामिल नहीं है। अनेक नाटो राष्ट्र यूक्रेन की सहायता नहीं कर पा रहे हैं।
जर्मनी ने बताई यूक्रेन का समर्थन घटने की वजह
जर्मन रक्षा मंत्री ने यूक्रेन को हथियारों की आपूर्ति पिछड़ने की वजह बताते हुए बोला कि यूरोपीय रक्षा उत्पादन बहुत मंद है। इसे बढ़ाना होगा। उन्होंने उन अटकलों को खारिज कर दिया कि जर्मनी कीव को युद्ध के मैदान में बड़ी बढ़त हासिल करने से रोकने के लिए सेना सहायता में देरी कर रहा है। बोरिस पिस्टोरियस ने एक इंटरव्यू में याद दिलाते कहा कि यूक्रेन जर्मनी का सहयोगी नहीं है। उन्होंने कहा, “फिलहाल हमारे सामने यह परेशानी है कि हथियार उद्योग कुछ क्षेत्रों में आवश्यकता के अनुसार तेजी से काम नहीं कर सकता है।” इसलिए इसमें गति लाने की आवश्यकता है।