यूक्रेन के विरूद्ध जंग छेड़ने वाले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अब उन राष्ट्रों को चेतावनी दी है जो उसके ऑयल की मूल्य सीमा (प्राइस कैपिंग) करने की तैयारी कर रहे हैं. पुतिन ने बोला है कि जो राष्ट्र इस योजना में शामिल होंगे उनको रूस की ओर से ऑयल और गैस की सप्लाई बंद कर दी जाएगी. उन्होंने कहा, ऐस करना एकदम मूर्खतापूर्ण निर्णय होगा.
पुतिन ने प्रशांत बंदरगाह शहर व्लादिवोस्तोक में ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम को बताया कि ऑयल की कीमतों को सीमित करना, जैसा कुछ पश्चिमी राष्ट्र विचार कर रहे हैं, एकदम मूर्खतापूर्ण निर्णय होगा. उन्होंने कहा, ‘अगर यह हमारे हितों के उल्टा है, तो हम अपने आर्थिक हितों को देखते हुए किसी भी चीज की सप्लाई नहीं करेंगे. कोई गैस नहीं, कोई ऑयल नहीं, कोई कोयला नहीं, कोई ईंधन ऑयल नहीं, कुछ भी नहीं.’
दरअसल, जी7 औद्योगिक शक्तियों ने शुक्रवार को यूक्रेन में मास्को की सेना कार्रवाई के लिए धन के एक प्रमुख साधन को रोकने के लिए, रूसी ऑयल आयात पर मूल्य कैप को लागू करने की दिशा में तुरन्त कदम उठाने का आह्वान किया. पुतिन ने कहा, रूस अपने एग्रीमेंट संबंधी दायित्वों को सम्मान करेगा और आशा है कि अन्य राष्ट्र भी ऐसा ही करेंगे.
मौजूदा एग्रीमेंट के अतिरिक्त कुछ भी
सर्दियों से पहले यूरोप में बढ़ती ऊर्जा की कीमतों की ओर से इशारा करते हुए, पुतिन ने बोला कि रूस मौजूदा एग्रीमेंटों के अतिरिक्त कुछ भी आपूर्ति नहीं करेगा. सब कुछ फ्रीज कर देगा. वहीं, कीमतों पर सब्सिडी देने को लेकर पुतिन ने कहा, आर्थिक दृष्टि से यह ठीक है, सामाजिक दृष्टिकोण से यह घातक है. इससे विस्फोट हो सकता है. ऐसे में नियमों का ठीक से पालन करना ही बेहतर है.
क्या है जी7?
जी7 प्रमुख औद्योगिक राष्ट्रों का एक समूह है जिसमें कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं. इस वर्ष जर्मनी G7 की अध्यक्षता कर रहा है. यूक्रेन के विरूद्ध लड़ाई छेड़ने के बाद यह राष्ट्र रूसी ऑयल की कीमतों की एक सीमा निर्धारित करने की तैयारी कर रहे हैं. इसके लिए यह राष्ट्र जल्द ही एक समझौते की घोषणा भी कर सकते हैं.