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रूस और यूक्रेन के चली आ रही लड़ाई के बीच आज खामोशि के पहल की तरफ कदम बढ़ाने की पहल हो रही है. दोनों राष्ट्रों के बीच बेलारूस में वार्ता शुरू हो चुकी है. वार्ता के लिए रूस और यूक्रेन की तरफ से एक डेलिगेशन वहां पहुंचा है. वहीं यूक्रेन के राष्ट्रपति कामालय की तरफ से कहा गया है कि रूस के साथ वार्ता का मुख्य लक्ष्य तत्काल युद्धविराम और रूसी सैनिकों की वापसी है. यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने शुरू में बेलारूस में वार्ता के लिए मीटिंग से मना कर दिया था. इसके बजाय, उन्होंने वारसॉ, पोलैंड की राजधानी, बुडापेस्ट, हंगरी की राजधानी, ब्रातिस्लावा, स्लोवाकिया की राजधानी, इस्तांबुल, तुर्की की राजधानी और अज़रबैजान की राजधानी बाकू का नाम रखा. जिसके पीछे की वजह य़ूक्रेन को लेकर बेलारूस का स्टैंड के बड़ी वजह है.
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने रक्षा प्रमुखों को राष्ट्र के परमाणु बलों को ‘हाई अलर्ट’ पर रखने का आदेश दिया. इन सब के बीच रूस के मित्र बेलारूस ने भी यूक्रेन को लेकर अपनी निगाहें तरेरते हुए तीसरे विश्व युद्ध की चेतावनी दी है. बेलारूस के तानाशाह अलेक्जेंडर लुकाशेंको ने रूस को परमाणु हथियार तैनात करने की अनुमति दी थी. कुछ रक्षा जानकारों का कहना है कि बेलारूसी गवर्नमेंट के फैसले से अमेरिका के नेतृत्व वाले नाटो गठबंधन पर दबाव बढ़ सकता है. बेलारूसी गवर्नमेंट के एक बयान में कहा गया है, “खामोशि वार्ता की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं.
बता दें कि बेलारूस की सीमा यूक्रेन से लगती है. बेलारूस रूस और यूक्रेन के बीच छिड़ी इस जंग में अब तक आधिकारिक रूप से अलग था लेकिन अब अमेरिका की ओर से आशंका जताई जा रही है कि बेलारूस की सेना पुतिन की सेना के साथ मिल सकती है. मास्को-कीव संघर्ष से कुछ महीने पहले रूसी सैनिक बेलारूस पहुंचे थे. यूक्रेन-बेलारूस सीमा पर संयुक्त युद्ध एक्सरसाइज भी किया था. रूसी सैनिकों ने यूक्रेन में बेलारूसी सीमा पार की और चेरनोबिल परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर कब्जा कर लिया.