रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से हिंदुस्तान और रूस के संबंध कसौटी के सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं. दोनों ही राष्ट्रों की पारंपरिक दोस्ती इस कसौटी के पैमाने पर बार-बार कसी जा रही है. हालांकि यूक्रेन पर रूस के हमले की निंदा नहीं करके और पश्चिमी राष्ट्रों की ओर से रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद उससे कच्चा ऑयल खरीदकर हिंदुस्तान ने दोस्ती निभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है, लेकिन अमेरिका और यूरोप समेत पश्चिमी राष्ट्रों के साथ बढ़ती हिंदुस्तान की नजदीकी रूस को कतई अच्छी नहीं लग रही.
इससे दोनों राष्ट्रों में अंदर ही अंदर कुछ न कुछ मनमुटाव जरूर बना हुआ है. हालांकि अब यह मनमुटाव दक्षिण अफ्रीका में विदेश मंत्री जयशंकर और रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव की मुलाकात के बाद दूर हो गया है. एक बार फिर से दोनों राष्ट्रों के संबंध खिलखिलाने लगे हैं.
दक्षिण अफ्रीका में विदेश मंत्री एस।जयशंकर ने बृहस्पतिवार को अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव से मुलाकात की और द्विपक्षीय एवं अंतरराष्ट्रीय हितों के मुद्दों पर चर्चा की. पांच राष्ट्रों के समूह ‘ब्रिक्स’ (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) के एक सम्मेलन में भाग लेने के लिए यहां पहुंचे जयशंकर ने ब्रिक्स राष्ट्रों के विदेश मंत्रियों की बैठक से इतर लावरोव के साथ वार्ता की. जयशंकर ने ट्वीट कर कहा, ‘‘आज सुबह केपटाउन में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मिलकर अच्छा लगा. हमारी चर्चा में द्विपक्षीय मामले, ब्रिक्स, जी20 और एससीओ शामिल थे.’
जुलाई में हिंदुस्तान करेगा एससीओ शिखर सम्मेलन की मेजबानी
भारत क्रमशः जुलाई और सितंबर में शंघाई योगदान संगठन (एससीओ) और जी-20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा. पिछले कुछ महीनों में हिंदुस्तान रूस से रियायती कच्चे ऑयल का प्रमुख आयातक बन गया है, जबकि पश्चिम में यूक्रेन पर रूसी हमले के मद्देनजर इस खरीद को लेकर बेचैनी बढ़ रही है. रूस के साथ हिंदुस्तान के आर्थिक संबंध पिछले एक वर्ष में और मजबूत हुए हैं, जिसका मुख्य कारण रूस से रियायती ऑयल की खरीद है. हिंदुस्तान ने अभी तक यूक्रेन पर रूसी हमले की निंदा नहीं की है और वह वार्ता एवं कूटनीति के माध्यम से संघर्ष के निवारण पर जोर दे रहा है.