इमरान खान की कुर्सी पर खतरा इनकमा तो उन्हें हिन्दुस्तान की याद आ रही है. एक बार फिर उन्होंने हिंदुस्तान की विराष्ट्र नीति की प्रशंसा की इमरान गवर्नमेंट के मंत्री गवर्नमेंट बचाने के लिए तरह-तरह की दलीलें भी दे रहे हैं. कोई ये विश्वास नहीं कर सकता कि इमरान खुलकर हिंदुस्तान और नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करेंगे. इमरान खान ने स्वयं कबूल कर लिया की हिन्दुस्तान के सामने पाकिस्तानिस्तान की कोई हैसियत नहीं है. इमरान की जुबान पर बार-बार हिंदुस्तान और मोदी का नाम क्यों आ रहा है. शत्रु जब मीठी-मीठी बातें करने लगे तो उसकी नीयत को समझना चाहिए.
आई, मी और माय सेल्फ
हिन्दुस्तान की प्रशंसा
बीते दिन इमरान ने कहा, ‘मैं भारत को दाद देता हूं, उनकी विराष्ट्र नीति स्वतंत्र रही है और सिर्फ अपने लोगों के लिए रही है. वो अपनी विराष्ट्र नीति की रक्षा करने बहुत अच्छे से जानते हैं. उन्होंने दो-दो बार हिंदुस्तान के प्रशंसाों के पुल बांध दिए. पहले उन्होंने इस्लामाबाद सिक्यॉरिटी डायलॉग में और फिर एक पाकिस्तानिस्तानी न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में हिंदुस्तानीय विराष्ट्र नीति की विशेषताें गिनाईं.
मुसीबत में फंसी जान तो मोदी बने महान
ये वही इमरान हैं तो कल तक मोदी को भला-बुरा कह रहे थे. मगर समय का चक्र देखिए आज हिंदुस्तान की प्रशंसा करते नहीं थक रहे. विराष्ट्र नीति हो या राष्ट्र के भीतर की नीति इमरान हर फ्रंट पर फ्लाप साबित हुए हैं. ऐसे में इमरान की आशा की एक ही किरण नजर आ रही है और वो हैं नरेंद्र मोदी. अब तो रूस ने भी मान लिया है कि वो हिंदुस्तान की है जो मास्को वाली टेंशन समाप्त कर सकता है. रूस और यूक्रेन के बीच मध्यस्थता कर सकता है. वैश्वकि राजनीति में नरेंद्र मोदी एक बहुत बड़ा फैक्टर हैं. इमरान को पता है इसलिए एक हफ्ते से लगातार मोदी-मोदी किए जा रहे हैं.