चीन में Covid-19 को फैलने से रोकने के लिए लागू किए गए कड़े प्रतिबंधों के विरूद्ध देशभर में प्रदर्शन तेज हो गए हैं. इस बीच, राष्ट्र में संक्रमण के मुद्दे तेजी से बढ़ रहे हैं और 27 नवंबर को पहली वार 40,000 नए मुद्दे सामने आए. बताया जा रहा है कि कई प्रदर्शनकारियों को अरैस्ट किया गया है.
चीन दुनिया की तीन बड़ी महाशक्तियों में सुमार है. लेकिन इसी राष्ट्र में आम लोग आज सबसे अधिक परेशान हैं. पुरानी कहावत है कि इतिहास स्वयं को दोहराता है और चीन की जनता शायद 1989 के इतिहास को दोहराने के लिए सड़कों पर उतर आई है. चीन में शी जिनपिंग के विरूद्ध विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है. पीएलए और राष्ट्रपति की तानाशाही से तंग आकर जनता ने जिनपिंग के विरूद्ध मोर्चा खोल दिया है. चीन की जनता सड़कों पर हंगामा काट रही है और जिनपिंग के इस्तीफे की मांग कर रही है. चीन की जनता अब लोकतंत्र की मांग कर रही है.
चीन में Covid-19 को फैलने से रोकने के लिए लागू किए गए कड़े प्रतिबंधों के विरूद्ध देशभर में प्रदर्शन तेज हो गए हैं. इस बीच, राष्ट्र में संक्रमण के मुद्दे तेजी से बढ़ रहे हैं और 27 नवंबर को पहली वार 40,000 नए मुद्दे सामने आए. बताया जा रहा है कि कई प्रदर्शनकारियों को अरैस्ट किया गया है. यूनिवर्सिटी के विद्यार्थी सफेद कागज लेकर मूक प्रदर्शन करते दिखे. पेइचिंग और नानजिंग यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों ने भी प्रदर्शन किया. एक शख्स झाओ ने बोला कि प्रदर्शनकारियों ने ‘शी चिनफिंग, इस्तीफा दो, कम्युनिस्ट पार्टी सत्ता छोड़ो’, ‘शिंचियांग से प्रतिबंध हटाओ, चीन से प्रतिबंध हटाओ’, ‘हम स्वतंत्रता चाहते हैं’ के नारे लगाए. चीन. में इस तरह के प्रदर्शन आम बात नहीं है.
रविवार की रात शंघाई में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान, जैसे ही प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं, रैली को कवर कर रहे बीबीसी के एक पत्रकार को पुलिस ऑफिसरों द्वारा घसीटा गया, लात मारी गई, हथकड़ी लगाई गई और कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया. प्रारंभ में, पुलिस ने राष्ट्र भर में विरोध प्रदर्शनों की अनुमति दी थी और दूर से ही देखती थी. हालांकि, उन्होंने प्रदर्शनकारियों को बंद करना प्रारम्भ कर दिया है और उनमें से कुछ को कई शहरों में अरैस्ट कर लिया है. शंघाई में, प्रदर्शनकारी रविवार की रात कम हो गए, लेकिन भोर में बड़ी संख्या में सड़कों पर वापस आ गए. उन्होंने “लोगों को रिहा करो” का नारा लगाया.