जून 2020 में गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के अरमानों पर अपनी बहादुरी से पानी फेर देने वाले इंडियन आर्मी के जवानों की गाथा हमेशा इतिहास के पन्नों में अमर रहेगी. भारतीय सीमा में घुसपैठ कर रहे चीन की पीएलए सेना को जवानों ने बॉर्डर पार करने से पहले ही मृत्यु की नींद सुला दिया था. आर्मी सूत्रों के मुताबिक इस दौरान चीन के करीब 60 जवान मारे गए थे. जबकि 20 भारतीय जवानों को भी शहीद होना पड़ा था. चीन के साथ झड़प में शहीद हुए सैन्यकर्मियों को बृहस्पतिवार को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने श्रद्धांजलि दी और उस घटना की तीसरी बरसी पर बोला कि शहीद सैनिकों का साहस, बहादुरी और बलिदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा.
यह झड़प पिछले कई दशकों में हिंदुस्तान और चीन के बीच सबसे गंभीर सेना विवाद था. सिंह ने ट्वीट किया, “आज हम उन बहादुर जवानों को श्रद्धांजलि देते हैं जिन्होंने गलवान घाटी में हमारे राष्ट्र की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया. उनका साहस, बहादुरी और बलिदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा.” गौरतलब है कि 15 जून, 2020 को हुई झड़पों के बाद पूर्वी लद्दाख सीमा पर गतिरोध काफी बढ़ गया था जिसमें हिंदुस्तान के 20 सैनिक शहीद हो गए थे. चीन ने फरवरी 2021 में आधिकारिक रूप से स्वीकार किया कि झड़पों में उसके पांच सेना अधिकारी और सैनिक मारे गए थे. हालांकि माना जाता है कि मारे गए चीनी सैनिकों की संख्या बहुत अधिक थी.
भारत-चीन सीमा पर कायम है तनाव
दोनों राष्ट्रों की सेनाएं सीमा पर तनाव कम करने के लिए वार्ता कर रही हैं, क्योंकि अभी भी कुछ स्थानों पर दोनों पक्ष के बीच गतिरोध कायम है. हालांकि कुछ अन्य स्थानों से दोनों राष्ट्रों के सैनिक पीछे हट गए हैं. पूर्वी लद्दाख सीमा पर गतिरोध बढ़ने के बाद, सेना ने क्षेत्र में अपनी परिचालन क्षमताओं को बढ़ाने के लिए कई तरीका किए हैं. इस बीच दोनों राष्ट्रों की सेनाओं के बीच अब तक 18 दौर की हाई लेवल वार्ता हो चुकी है, जिसका मकसद विवाद वाले शेष स्थानों से सैनिकों के हटाने की प्रक्रिया में तेजी लाना और पूर्वी लद्दाख में असली नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शांति बहाल करना है.