आबे को पश्चिमी जापान के नारा में भाषण प्रारम्भ करने के कुछ मिनटों बाद ही गोली मार दी गयी थी. उन्हें विमान से एक हॉस्पिटल ले जाया गया लेकिन उनकी सांस नहीं चल रही थी और उनकी दिल गति रुक गयी थी.
जापान के पूर्व पीएम शिंजो आबे का, एक चुनावी कार्यक्रम के दौरान शुक्रवार को गोली मारे जाने के बाद मृत्यु हो गया. सरकारी प्रसारणकर्ता एनएचके ने यह जानकारी दी. आबे को पश्चिमी जापान के नारा में भाषण प्रारम्भ करने के कुछ मिनटों बाद ही गोली मार दी गयी थी. उन्हें विमान से एक हॉस्पिटल ले जाया गया लेकिन उनकी सांस नहीं चल रही थी और उनकी दिल गति रुक गयी थी. हॉस्पिटल में बाद में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया. एक प्रमुख सियासी परिवार में जन्मे, शिंजो आबे, राष्ट्र के सबसे लंबे समय तक रहने वाले पीएम भी थे. आइए उनके जीवन और सियासी करियर से जुड़े पहलुओं के बारे में आपको बताते हैं.
21 सितंबर, 1954: शिंजो आबे का जन्म टोक्यो में हुआ. शिंजो के पिता शिंतारो आबे जापान के युद्ध के बाद के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले और लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रमुख सदस्य थे. जिन्होंने जापान के विदेश मंत्री के रूप में सेवा की. वहीं आबे के नाना नोबुसुके किशी जापान के पीएम रह चुके हैं.
1979: आबे ने विदेशों में अपनी उपस्थिति बढ़ाने वाली कोबे स्टील में काम करना प्रारम्भ किया.
1982: शिंजो आबे ने विदेश मंत्रालय और सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ नए पदों पर काम करने के लिए कंपनी छोड़ दी.
1993: इसी साल आबे के सियासी करियर में उछाल आई. यामागुची के दक्षिण-पश्चिमी प्रान्त का अगुवाई करने वाले एलडीपी विधायक के रूप में पहली बार चुने गए. आबे पिता की तर्ज पर ही पहले से ही एक रूढ़िवादी के रूप में देखे जाने वाले नेता थे.
2005: आबे को प्रधान मंत्री जुनिचिरो कोइज़ुमी के अनुसार मुख्य कैबिनेट सचिव नियुक्त किया गया, जिस दौरान उन्होंने उत्तर कोरिया में अपहृत जापानी नागरिकों को वापस करने के लिए वार्ता का नेतृत्व किया. उसी साल उन्हें एलडीपी का प्रमुख चुना गया, जिससे उन्हें पीएम के रूप में पदभार संभालने के लिए तैयार किया गया.
26 सितंबर, 2006: आबे पहली बार जापान के पीएम बने. इस दौरान उन्होंने उत्तर कोरिया पर कड़ा रुख अपनाते हुए और दक्षिण कोरिया और चीन के साथ जुड़ने की मांग करते हुए आर्थिक सुधारों की देखरेख की.
2007: चुनावी हार के बाद एलडीपी ने 52 सालों में पहली बार विधायिका का नियंत्रण खो दिया. आबे ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए पीएम के रूप में इस्तीफा दे दिया. आबे अल्सरेटिव कोलाइटिस से पीड़ित थे, लेकिन दवा से इसे नियंत्रित करने में सक्षम थे.
2012: फिर से एलडीपी अध्यक्ष चुने जाने के बाद, आबे दूसरी बार पीएम बने. चुनाव के दौरान जापान के लोगों से इकोनॉमी को मजबूत बनाने, डिफ्लेशन पर लगाम लगाने, दूसरे विश्व युद्ध के बाद लागू संविधान की पाबंदियों को कम करने और पारंपरिक मूल्यों को बहाल करने का वादा किया था.
2013: विकास को बढ़ावा देने के लिए शिंजो आबे के ‘आबेनॉमिक्स’ सिद्धांत को पूरे विश्व में चर्चा तो खूब मिली. चीन के साथ जापान के संबंध विशेष रूप से खराब हो गए हैं, लेकिन आबे के बीजिंग में APEC शिखर सम्मेलन में चीनी नेता शी जिनपिंग के साथ मुलाकात के बाद इसमें सुधार होना प्रारम्भ हो गया.
2014-2020: आबे फिर से एलडीपी के नेता गए. जिसके दौरान उन्होंने तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ घनिष्ठ संबंध विकसित किए और, एक साथ शिखर सम्मेलन और गोल्फिंग की. गोल्फ कोर्स पर एबे ने ट्रंप के साथ ली अपनी सेल्फी की तस्वीरों को ट्वीट करते बोला था कि वह ‘जापान-अमरीका गठबंधन को नए जापानी युग में और मजबूत बनाएंगे.’ ट्रंप ने भी एक ट्वीट करते हुए लिखा ‘प्रधानमंत्री एबे शिंजो से मिलकर बहुत अच्छा लगा.
28 अगस्त, 2020: शिंजो आबे की राजनीति में पकड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह इतिहास के सबसे लंबे अवधि वाले पीएम थे. उन्होंने 7 वर्ष 6 महीने तक जापान की सत्ता पर राज किया लेकिन आंत की एक गंभीर रोग के चलते उन्होंने इस पद से इस्तीफा दे दिया था.
2021: पद छोड़ने के बावजूद आबे ने अपने बयानों के जरिए दिखाया कि वो अभी भी ताइवान पर टिप्पणियों के जरिये बीजिंग को चिंता में डालने का माद्दा रखते हैं. आबे ने स्व-शासित द्वीप पर चीन के अपने क्षेत्र के रूप में दावा और हमले की धमकी को लेकर एक भाषण में चेतावनी देते हुए किसी भी प्रजाति की सेना कार्रवाई आर्थिक खुदकुशी की ओर ले जाने वाला कदम बताया था.”
सबसे अधिक हिंदुस्तान का दौरा करने वाले प्रधानमंत्री
शिंजो आबे जापान के ऐसे पीएम रहे हैं, जिन्होंने सबसे अधिक बार अपने कार्यकाल के दौरान हिंदुस्तान का दौरा किया. पहली बार शिंजो आबे अपने पहले कार्यकाल (2006-07) के दौरान हिंदुस्तान आए. अपने दूसरे कार्यकाल (2012-2020) के दौरान शिंजो आबे ने तीन बार हिंदुस्तान का दौरा किया. वो जनवरी 2014, दिसंबर 2015 और सितंबर 2017 में हिंदुस्तान के दौरे पर आए.
शिंजो आबे और उत्तर कोरिया
शिंजो आबे की गवर्नमेंट ही थी जिसने अपने पद की पिछले अवधि के दौरान उत्तर कोरिया पर उक्त संदर्भित प्रतिबंध लगाए थे. ये प्रतिबंध संयुक्त देश द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के अतिरिक्त थे.